Namaste Samthar

· Rajkamal Prakashan
Ebook
160
Pages

About this ebook

कुन्तल ने चाहा था कि एक साहित्यिक संस्था के ज़िम्मेदार पद पर आई है तो साहित्य को समाज की मशाल बनाने का उद्योग करेगी। कुछ ऐसा करेगी कि उस मँझोले शहर का कोना-कोना साहित्य के स्पर्श से स्पन्दित हो उठे। युवा प्रतिभाओं को वह आकाश मिले जो उनका हक़ है, और मनुष्य को वह दृष्टि जिससे मनुष्यों का यह क्षुद्र संसार भी जीने योग्य हो उठता है। लेकिन उसे पता भी नहीं लगा, और जाने कितने तीरों, कितने आरोपों, कितने सवालों की नोक पर उसे रख दिया गया। उसका सपने देखना, वह भी स्त्री होकर, यही उसका अपराध हो गया। राजनीति की सबसे निकृष्ट चालों से लिथड़ा साहित्य-संसार अचानक उसे एक काली कारा जैसा महसूस हुआ।

अकेले बैठकर वह बस सोचती ही रह जाती कि जिन शब्दों से सृष्टि के संताप को व्यक्त करने, आदमीयत की उलझनों को खोलने का काम लिया जाना था, वे संकीर्ण स्वार्थों के हड़ियल हाथों का खिलौना कैसे बन गए, कब और क्यों! मैत्रेयी पुष्पा का यह उपन्यास इन्हीं सवालों से जूझता हुआ, साहित्य और संस्कृति की दुनिया के उन कोनों से परदा उठाता है, जहाँ शब्दों की बाज़ीगरी अपने निकृष्टतम रूप में दिखाई देती है, और जहाँ एक उत्साहसम्पन्न, विज़नरी स्त्री उस यथार्थ से हार-हार कर लड़ती जाती है, जिस यथार्थ को न्याय के पैरोकारों ने अपनी छिछली स्वार्थपरता से गढ़ा है। सुगढ़ भाषा और सान्द्र स्त्री अनुभव से रचा यह उपन्यास हमारे समय के साहित्यिक समाज, राजनीतिक दिग्भ्रम और मर्दाना वर्चस्व से हर जगह लड़ती औरत की समग्र कथा है।

कुन्तल ने चाहा था कि एक साहित्यिक संस्था के ज़िम्मेदार पद पर आई है तो साहित्य को समाज की मशाल बनाने का उद्योग करेगी। कुछ ऐसा करेगी कि उस मँझोले शहर का कोना-कोना साहित्य के स्पर्श से स्पन्दित हो उठे। युवा प्रतिभाओं को वह आकाश मिले जो उनका हक़ है, और मनुष्य को वह दृष्टि जिससे मनुष्यों का यह क्षुद्र...

Rate this ebook

Tell us what you think.

Reading information

Smartphones and tablets
Install the Google Play Books app for Android and iPad/iPhone. It syncs automatically with your account and allows you to read online or offline wherever you are.
Laptops and computers
You can listen to audiobooks purchased on Google Play using your computer's web browser.
eReaders and other devices
To read on e-ink devices like Kobo eReaders, you'll need to download a file and transfer it to your device. Follow the detailed Help Center instructions to transfer the files to supported eReaders.