Shaam Kee Chaay Tak...

· Harsh Ranjan
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Mayelana nale ebook

ॐ नमः शिवाय!

अपनी ही एक कहानी पर नजर पड़ी और लगा कि इस कहानी को अलग से एक जिल्द न देना इसके साथ अन्याय होगा। इस बड़ी कहानी को दूसरे संस्करण में आपके सामने ला रहा हूँ। आप इस कहानी में एक विरक्ति की अनुभूति करेंगे। ये विरक्ति किसी पहाड़ के कन्दरा में बैठे व्यक्ति की नहीं है। ये विरक्ति है भीड़ में खड़े, भीड़ से, बाजार से और लेनदार-देनदार से एक निर्लिप्तता। ये भीड़ में एक एकांत कोना है। इस कोने के एकांत को कभी-कभी ऐसे व्यक्ति को इसी भांति यत्नपूर्वक संजोना होता है। कभी, कहीं दूर से देखते किसी एक इंसान को, इस कोने के प्रति विशेष परिस्थितियों में जिज्ञासा भी हो सकती है और लगाव भी। इस जिज्ञासा एवं लगाव और इन्हें घेरती भीड़ से किसी की विमुखता का और दृढ़तर होता जाना, इस कहानी का सार है। इस दूसरे संस्करण को सराहें और तब तक मुझे अगली पुस्तक के लिए आज्ञा दें। कल्याण हो!

हर्ष रंजन। 

ॐ नमः शिवाय! अपनी ही एक कहानी पर नजर पड़ी और लगा कि इस कहानी को अलग से एक जिल्द न देना इसके साथ अन्याय होगा। इस बड़ी कहानी को दूसरे संस्करण में आपके सामने ला रहा हूँ। आप इस कहानी में एक विरक्ति की अनुभूति करेंगे। ये विरक्ति किसी पहाड़ के कन्दरा में बैठे व्यक्ति की नहीं है। ये विरक्ति है भीड़ में खड़े,...

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Mayelana nomlobi

हर्ष रंजन (पिछले दशक के ‘राजहंस’) की ओर से उसके अपने पेज पर आपका स्वागत है। प्रकाशित तीस से ज्यादा पुस्तकों के साथ मैं आप तक ये जरूर पहुंचाना चाहुंगा कि लिखना कठिन है, जीना थोड़ा और कठिन है, लेकिन लिखना और जीना, एक साथ, कहीं ज्यादा कठिन। अगर इतनी कठिनाई से मन तृप्त न हुआ तो थोड़ी कठिनाई और जोड़ लीजिए कि आप के रंगे पन्ने न नोटों की गड्डियां हैं, न तो प्रॉपर्टी के पेपर और न तो वसीयत के दस्तावेज। ये सिर्फ आत्म-अभिव्यक्ति है।

लेखक और वक्ता में सिर्फ इतना अंतर रहता है कि पहले वाले को ये नहीं पता कि उसे कौन-कौन पढ़ेगा। वो अक्सर उसे सुनाने लिखता है जिससे वो कह नहीं सकता, या वो वह पन्नों में डालता है जो वो कह नहीं सकता। या तो ये कोई दुख, कोई संताप होता है या कोई अनोखापन या कोई जानकारी।

ज्यादातर मौलिक लेखक कभी पैसे कमाने के उद्देश्य देखकर कलम नहीं उठाते। वो अपनी बात कहते हैं, अपेक्षा रखते हैं कि उन्हें समझा जाये और उनसे सहमत हुआ जाए या उनसे सहानुभूति रखी जाए। कुछ यही सोचकर मैंने भी लिखना शुरू किया था।

कई हिंदी लेखकों की तरह मैंने भी अपना एक छोटा नाम रखा, आनंद! आनंद, बंद कमरे में किताब के नाम पर कुछ-कुछ लिखके कमरे में ही उन सारे पन्नों के साथ दफन हो गया! एक लड़का फिर खड़ा हुआ, जिसका नाम था, राजहंस! ऑनलाइन दुनिया व पहुंच से ऊपर की ऑफ़लाइन दुनिया की कुछ बेहद कड़वी और अकथनीय सच्चाइयां घूँटकर वो लौट गया! सालों आस-पास की सर्द और बेदर्द, जानी-अनजानी गलियों में जीने का हुनर सीखने की जिद में, जो वो था वो बने रहने की जिच में, उसने हज़ारों पन्नों का संसार खड़ा कर लिया था।

ये किताबें आपके या कार्यालयों की लाइब्रेरी में या फिर इंटरनेट के डिजिटल जंगल में कुछ ऐसी ही हैं मानो मिट्टी पर गिरा खून। वो कुछ समय बाद दाग बन रह जायेगा और फिर हल्का होता मिट जाएगा। ये जिंदगी के धरातल पर रगड़ खाते हुए चुक गयी जीवन-ऊर्जा है।

कोई भी यथार्थ-वादी लेखक बस यही चाहता है कि जो उसने देखा, या उसके साथ हुआ, वो दुर्देव या मानवीय/सामाजिक/व्यवस्था-जनित भूल दुनिया मे दुबारा न हो!

हर्ष रंजन (पिछले दशक के ‘राजहंस’) की ओर से उसके अपने पेज पर आपका स्वागत है। प्रकाशित तीस से ज्यादा पुस्तकों के साथ मैं आप तक ये जरूर पहुंचाना चाहुंगा कि लिखना कठिन है, जीना थोड़ा और कठिन है, लेकिन लिखना और जीना, एक साथ, कहीं ज्यादा कठिन। अगर इतनी कठिनाई से मन तृप्त न हुआ तो थोड़ी कठिनाई और जोड़ लीजि...

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Ulwazi lokufunda

Amasmathifoni namathebulethi
Faka uhlelo lokusebenza lwe-Google Play Amabhuku lwe-Android ne-iPad/iPhone. Livunyelaniswa ngokuzenzakalela ne-akhawunti yakho liphinde likuvumele ukuthi ufunde uxhunywe ku-inthanethi noma ungaxhunyiwe noma ngabe ukuphi.
Amakhompyutha aphathekayo namakhompyutha
Ungalalela ama-audiobook athengwe ku-Google Play usebenzisa isiphequluli sewebhu sekhompuyutha yakho.
Ama-eReaders namanye amadivayisi
Ukuze ufunde kumadivayisi e-e-ink afana ne-Kobo eReaders, uzodinga ukudawuniloda ifayela futhi ulidlulisele kudivayisi yakho. Landela imiyalelo Yesikhungo Sosizo eningiliziwe ukuze udlulise amafayela kuma-eReader asekelwayo.