Sahitya Aur Samaj

· Lokbharti Prakashan
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साहित्य और समाज समर्थ साहित्यकार, ओजस्वी वक्ता और प्रखर चिन्तक राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर के साहित्य की विभिन्न विधाओं और समस्याओं को समर्पित चिंतनपूर्ण अठारह निबंधो का संकलन है ! यह पुस्तक यहाँ एक तरफ-परंपरा और भारतीय साहित्य, साहित्य पर विज्ञानं का प्रभाव, साहित्य में आधुनिकता, समाजवाद के अन्दर साहित्य, साहित्य का नूतन ध्येय, कलाकार की सफलता, भविष्य के लिए लिखने की बात, लेखकों का कार्य-शिविर, हिंदी साहित्य पर गांधीजी का प्रभाव, पाकिस्तान के पीछे साहित्य की प्रेरणा, श्री अरविन्द की साहित्यिक मान्यताएँ जार्ज रसल का साहित्य-चिंतन आदि निबंधों द्वारा समाज और साहित्य पर प्रकाश डालती है तो दूसरी तरफ-अर्धनारीश्वर, कला, धर्म और विज्ञान, आउट-साइडर, रविंद्रनाथ की राष्ट्रीयता और अन्तराष्ट्रीयता, क्या रविंद्रनाथ अभारतीय हैं?, महात्मा टॉलस्टॉय जैसे विषयों पर दिनकर जी के गंभीर चिंतन को भी हमारे सम्मुख लाती है ! पठनीय और मननीय निबंधो से सुसज्जित यह पुस्तक राष्ट्रकवि दिनकर के चिन्तक स्वरुप को उद्घाटित करनेवाली एक श्रेष्ठ बौद्धिक कृति है !
साहित्य और समाज समर्थ साहित्यकार, ओजस्वी वक्ता और प्रखर चिन्तक राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर के साहित्य की विभिन्न विधाओं और समस्याओं को समर्पित चिंतनपूर्ण अठारह निबंधो का संकलन है ! यह पुस्तक यहाँ एक तरफ-परंपरा और भारतीय साहित्य, साहित्य पर विज्ञानं का प्रभाव, साहित्य में आधुनिकता, समाजवाद के अन...

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About the author

जन्म: 23 सितम्बर, 1908, एक निम्न-मध्यवर्गीय कृषक-परिवार में (सिमरिया, तत्कालीन मुंगेर जिला, बिहार)। शिक्षा: 1923 में मिडिल की परीक्षा पास की और 1928 में मोकामा घाट के रेलवे हाई स्कूल से मैट्रिकुलेशन। 1932 में पटना कॉलेज से ग्रेजुएशन, इतिहास में ऑनर्स के साथ। आजीविका: 1933 में बरबीघा (मुंगेर) में नवस्थापित हाई स्कूल में प्रधानाध्यापक। 1934 से 1942 तक बिहार सरकार के अधीन सब-रजिस्ट्रार। 1943 से 1947 तक प्रान्तीय सरकार के युद्ध-प्रचार-विभाग में। 1947 में बिहार सरकार के जन-सम्पर्क विभाग में उपनिदेशक। 1950 से 1952 (मार्च) तक लंगट सिंह कॉलेज, मुजफ्फरपुर (बिहार) में हिन्दी विभागाध्यक्ष और प्रोफेसर। 1952 से 1964 तक सरकारी नौकरी से त्यागपत्र देकर राज्यसभा के कांग्रेस द्वारा निर्वाचित सदस्य। 1964 में राज्यसभा की सदस्यता छोड़कर भागलपुर विश्वविद्यालय के उपकुलपति। मई, 1965 से 1971 तक भारत सरकार के गृह-मंत्रालय में हिन्दी सलाहकार। साहित्यिक जीवन का आरम्भ: 1924 में पाक्षिक ‘छात्र सहोदर’ (जबलपुर) में प्रकाशित पहली कविता से। प्रमुख कृतियाँ: कविता: रेणुका, हुंकार, रसवन्ती, कुरुक्षेत्र, सामधेनी, बापू, धूप और धुआँ, रश्मिरथी, नील कुसुम, उर्वशी, परशुराम की प्रतीक्षा, कोयला और कवित्व तथा हारे को हरिनाम। गद्य: मिट्टी की ओर, अर्धनारीश्वर, संस्कृति के चार अध्याय, काव्य की भूमिका, पन्त, प्रसाद और मैथिलीशरण, शुद्ध कविता की खोज तथा संस्मरण और श्रद्धांजलियाँ। सम्मान: 1959 में ‘संस्कृति के चार अध्याय’ पर साहित्य अकादेमी पुरस्कार और पद्मभूषण की उपाधि। 1962 में भागलपुर विश्वविद्यालय की तरफ से ‘डॉक्टर ऑफ लिटरेचर’ की मानद उपाधि। 1973 में ‘उर्वशी’ पर भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार। अनेक बार भारतीय और विदेशी सरकारों के निमन्त्रण पर विदेश-यात्रा। निधन: 24 अप्रैल, 1974।
जन्म: 23 सितम्बर, 1908, एक निम्न-मध्यवर्गीय कृषक-परिवार में (सिमरिया, तत्कालीन मुंगेर जिला, बिहार)। शिक्षा: 1923 में मिडिल की परीक्षा पास की और 1928 में मोकामा घाट के रेलवे हाई स्कूल से मैट्रिकुलेशन। 1932 में पटना कॉलेज से ग्रेजुएशन, इतिहास में ऑनर्स के साथ। आजीविका: 1933 में बरबीघा (मुंगेर) में ...

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