Rashmirathi

· Lokbharti Prakashan
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रश्मि: लाइट (किरण) रथी: रथ पर सवार होकर जो एक (रथवार नहीं) एक हिंदी महाकाव्य है, वह 1952 में हिंदी कवि रामधारी सिंह 'दिनकर' द्वारा लिखी गई थी। यह कर्ण के जीवन के आसपास केंद्रित है, जो महाकाव्य महाभारत में अविवाहित कुंती (पांडु की पत्नी) का पुत्र था। यह "कुरुक्षेत्र" और आधुनिक हिंदी साहित्य की क्लासिक्स के अलावा दिनकर की सबसे प्रशंसित कार्यों में से एक है। कर्ण कुंती का ज्येष्ठ पुत्र था, जिसे जन्म में छोड़ दिया था क्योंकि उन्हें कुंती की शादी से पहले अवगत कराया गया था। कर्ण एक नीच परिवार में बड़ा हुआ, फिर भी अपने समय के सर्वश्रेष्ठ योद्धाओं में से एक बन गया। कौरव की ओर से कर्ण की लड़ाई पांडवों के लिए एक बड़ी चिंता थी क्योंकि वह युद्ध में अजेय होने के लिए प्रतिष्ठित था। जिस तरह से दिनकर ने नैतिक दुविधाओं में फंसे मानव भावनाओं के सभी रंगों के साथ कर्ण की कहानी प्रस्तुत की है, वह सिर्फ अद्भुत है। लय और मीटर झुकाव कर रहे हैं शब्दों की पसंद और भाषा की शुद्धता प्राणपोषक है। अनुराग कश्यप द्वारा 2009 में निर्देशित हिंदी फिल्म "गुलाल" को दिनकर की कविता "यहीं देख गगन मुंह में हुई है" (भाग का "कृष्ण की चेतवानी") "रश्मीरी अध्याय 3" से पियुष मिश्र द्वारा प्रस्तुत किया गया है।
रश्मि: लाइट (किरण) रथी: रथ पर सवार होकर जो एक (रथवार नहीं) एक हिंदी महाकाव्य है, वह 1952 में हिंदी कवि रामधारी सिंह 'दिनकर' द्वारा लिखी गई थी। यह कर्ण के जीवन के आसपास केंद्रित है, जो महाकाव्य महाभारत में अविवाहित कुंती (पांडु की पत्नी) का पुत्र था। यह "कुरुक्षेत्र" और आधुनिक हिंदी साहित्य की क्ल...

Ratings and reviews

237 reviews
Somenath Burnwal
June 8, 2022
This book not just tells the story plainly about the Epic Mahabharata but the way the story is conveyed in poetry just touches the soul. Every person should read this book the rythm in which the book is written make you actually visualize the atmosphere of the story.
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Anshul Sharma
June 10, 2022
Really great, must read for any mythology enthusiast. Poem lovers should also read it. It had Vir Ras, Shok Ras and all. In totality - Really a masterpiece, give it a try.
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Govind Kumar
October 12, 2018
This book is totally outstanding, must read once. People should suggest their children to read this book in their early age. Definitely, this will work upon their mind and help to manage their life in positive way...
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About the author

जन्म: 23 सितम्बर, 1908, एक निम्न-मध्यवर्गीय कृषक-परिवार में (सिमरिया, तत्कालीन मुंगेर जिला, बिहार)। शिक्षा: 1923 में मिडिल की परीक्षा पास की और 1928 में मोकामा घाट के रेलवे हाई स्कूल से मैट्रिकुलेशन। 1932 में पटना कॉलेज से ग्रेजुएशन, इतिहास में ऑनर्स के साथ। आजीविका: 1933 में बरबीघा (मुंगेर) में नवस्थापित हाई स्कूल में प्रधानाध्यापक। 1934 से 1942 तक बिहार सरकार के अधीन सब-रजिस्ट्रार। 1943 से 1947 तक प्रान्तीय सरकार के युद्ध-प्रचार-विभाग में। 1947 में बिहार सरकार के जन-सम्पर्क विभाग में उपनिदेशक। 1950 से 1952 (मार्च) तक लंगट सिंह कॉलेज, मुजफ्फरपुर (बिहार) में हिन्दी विभागाध्यक्ष और प्रोफेसर। 1952 से 1964 तक सरकारी नौकरी से त्यागपत्र देकर राज्यसभा के कांग्रेस द्वारा निर्वाचित सदस्य। 1964 में राज्यसभा की सदस्यता छोड़कर भागलपुर विश्वविद्यालय के उपकुलपति। मई, 1965 से 1971 तक भारत सरकार के गृह-मंत्रालय में हिन्दी सलाहकार। साहित्यिक जीवन का आरम्भ: 1924 में पाक्षिक ‘छात्र सहोदर’ (जबलपुर) में प्रकाशित पहली कविता से। प्रमुख कृतियाँ: कविता: रेणुका, हुंकार, रसवन्ती, कुरुक्षेत्र, सामधेनी, बापू, धूप और धुआँ, रश्मिरथी, नील कुसुम, उर्वशी, परशुराम की प्रतीक्षा, कोयला और कवित्व तथा हारे को हरिनाम। गद्य: मिट्टी की ओर, अर्धनारीश्वर, संस्कृति के चार अध्याय, काव्य की भूमिका, पन्त, प्रसाद और मैथिलीशरण, शुद्ध कविता की खोज तथा संस्मरण और श्रद्धांजलियाँ। सम्मान: 1959 में ‘संस्कृति के चार अध्याय’ पर साहित्य अकादेमी पुरस्कार और पद्मभूषण की उपाधि। 1962 में भागलपुर विश्वविद्यालय की तरफ से ‘डॉक्टर ऑफ लिटरेचर’ की मानद उपाधि। 1973 में ‘उर्वशी’ पर भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार। अनेक बार भारतीय और विदेशी सरकारों के निमन्त्रण पर विदेश-यात्रा। निधन: 24 अप्रैल, 1974।
जन्म: 23 सितम्बर, 1908, एक निम्न-मध्यवर्गीय कृषक-परिवार में (सिमरिया, तत्कालीन मुंगेर जिला, बिहार)। शिक्षा: 1923 में मिडिल की परीक्षा पास की और 1928 में मोकामा घाट के रेलवे हाई स्कूल से मैट्रिकुलेशन। 1932 में पटना कॉलेज से ग्रेजुएशन, इतिहास में ऑनर्स के साथ। आजीविका: 1933 में बरबीघा (मुंगेर) में ...

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