Balchanama

· Rajkamal Prakashan
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‘बलचनमा’ की गणना हिंदी के कालजयी उपन्यासों में की जाती है। छठी दशाब्दी के आरंभिक वर्षों में प्रकाशित होते ही इसकी धूम मच गई और आज तक यह उसी प्रकार सर्वप्रिय है। इसे हिंदी का प्रथम आंचलिक उपन्यास होने का भी गौरव प्राप्त है। दुनिया के अन्य देशों की तरह भारत का सामंती जीवन भी गरीबों की त्रासदी से भरा पड़ा है, और यह परंपरा अभी समाप्त होने में नहीं आ रही। इस उपन्यास में चौथे दशक के आसपास मिथिला के दरभंगा जिले के जमींदार समाज और उनके अन्यायों की कहानी बड़े मार्मिक ढंग से लिखी गई है। ‘बलचनमा’ दरअसल एक प्रतीक है अत्याचारों से उपजे विद्रोह का जो धनाढ्य समाज के अत्याचारों की कारुणिक कथा कहता है। ‘बलचनमा’ का भाग्य उसे उसी कसाई जमींदार की भैंस चराने के लिए विवश करता है जिसने अपने बगीचे से एक कच्चा आम तोड़कर खा जाने के अपराध में उसके पिता को एक खंभे से बँधवाकर मरवा दिया था। लेकिन वह गाँव छोड़कर शहर भाग जाता है और ‘इंकलाब’, ‘सुराज’ आदि शब्दों का ठीक उच्चारण तक न कर पाने पर भी शोषकों से संघर्ष करने के लिए उठ रहे आंदोलन में शामिल हो जाता है। मनीषी कवि-कथाकार नागार्जुन का यह उपन्यास साहित्य की महत्त्वपूर्ण धरोहर है।
‘बलचनमा’ की गणना हिंदी के कालजयी उपन्यासों में की जाती है। छठी दशाब्दी के आरंभिक वर्षों में प्रकाशित होते ही इसकी धूम मच गई और आज तक यह उसी प्रकार सर्वप्रिय है। इसे हिंदी का प्रथम आंचलिक उपन्यास होने का भी गौरव प्राप्त है। दुनिया के अन्य देशों की तरह भारत का सामंती जीवन भी गरीबों की त्रासदी से भर...

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Ajay Kumar
May 13, 2019
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About the author

जन्म: सन् 1911 में ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन। जन्मस्थान: ग्राम तरौनी, जिला दरभंगा (बिहार)। परंपरागत प्राचीन पद्धति से संस्कृत की शिक्षा। सुविख्यात प्रगतिशील कवि-कथाकार। हिंदी, मैथिली, संस्कृत और बांग्ला में काव्य-रचना। पूरा नाम वैद्यनाथ मिश्र ‘यात्री’। मातृभाषा मैथिली में ‘यात्री’ नाम से ही लेखन। शिक्षा-समाप्ति के बाद घुमक्कड़ी का निर्णय। गृहस्थ होकर भी रमते-राम। स्वभाव से आवेगशील, जीवंत और फक्कड़। राजनीति और जनता के मुक्तिसंघर्षों में सक्रिय और रचनात्मक हिस्सेदारी। मैथिली काव्य-संग्रह ‘पत्रहीन नग्न गाछ’ के लिए साहित्य अकादेमी पुरस्कार। उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान तथा मध्य प्रदेश और बिहार के शिखर सम्मान सहित कई पुरस्कारों से सम्मानित। प्रमुख प्रकाशित पुस्तकें: रतिनाथ की चाची, बाबा बटेसरनाथ, दुखमोचन, बलचनमा, वरुण के बेटे, नई पौध आदि (उपन्यास); युगधारा, सतरंगे पंखोंवाली, प्यासी पथराई आँखें, तालाब की मछलियाँ, चंदना, खिचड़ी विप्लव देखा हमने, तुमने कहा था, पुरानी जूतियों का कोरस, हजार-हजार बाँहोंवाली, पका है यह कटहल, अपने खेत में, मैं मिलिटरी का बूढ़ा घोड़ा (कविता-संग्रह); भस्मांकुर, भूमिजा (खंडकाव्य); चित्रा, पत्रहीन नग्न गाछ (हिंदी में भी अनूदित मैथिली कविता-संग्रह); पारो (मैथिली उपन्यास); धर्मलोक शतकम् (संस्कृत काव्य) तथा संस्कृत से कुछ अनूदित कृतियाँ।
जन्म: सन् 1911 में ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन। जन्मस्थान: ग्राम तरौनी, जिला दरभंगा (बिहार)। परंपरागत प्राचीन पद्धति से संस्कृत की शिक्षा। सुविख्यात प्रगतिशील कवि-कथाकार। हिंदी, मैथिली, संस्कृत और बांग्ला में काव्य-रचना। पूरा नाम वैद्यनाथ मिश्र ‘यात्री’। मातृभाषा मैथिली में ‘यात्री’ नाम से ही लेखन। श...

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