‘सांध्यगीत’ में कुछ स्फुट गीत संगृहीत हैं। ‘सांध्यगीत’ मेरी उस मानसिक स्थिति को व्यक्त कर सकेगा जिसमें अनायास ही मेरा हृदय सुख-दु:ख में सामंजस्य का अनुभव करने लगा। मेरे गीत मेरा आत्म-निवेदन मात्र है—इनके विषय में कुछ कह सकना मेरे लिए सम्भव नहीं है! इन्हें मैं अपने उपहार के योग्य अकिंचन भेंट के अतिरिक्त और कुछ नहीं मानती। —महादेवी वर्मा
‘सांध्यगीत’ में कुछ स्फुट गीत संगृहीत हैं। ‘सांध्यगीत’ मेरी उस मानसिक स्थिति को व्यक्त कर सकेगा जिसमें अनायास ही मेरा हृदय सुख-दु:ख में सामंजस्य का अनुभव करने लगा। मेरे गीत मेरा आत्म-निवेदन मात्र है—इनके विषय में कुछ कह सकना मेरे लिए सम्भव नहीं है! इन्हें मैं अपने उपहार के योग्य अकिंचन भेंट के अत...