Nirja

· Lokbharti Prakashan
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महादेवी .वर्मा की हिन्दी काव्य-यात्रा में परिपक्वता की दृष्टि से 'नीरजा' का महत्त्वपूर्ण स्थान है । 'नीरजा' में बिकुल परिपक्व भाषा में एक समर्थ कवि बड़े अधिकार के साथ और बड़े सहज भाव से अपनी बात कहता है । महादेवी जी के अनुसार, ' 'नीरजा में जाकर गीति का तत्त्व आ गया मुझमें और मैंने मानो दिशा भी पा ली है । '' 
महादेवी .वर्मा की हिन्दी काव्य-यात्रा में परिपक्वता की दृष्टि से 'नीरजा' का महत्त्वपूर्ण स्थान है । 'नीरजा' में बिकुल परिपक्व भाषा में एक समर्थ कवि बड़े अधिकार के साथ और बड़े सहज भाव से अपनी बात कहता है । महादेवी जी के अनुसार, ' 'नीरजा में जाकर गीति का तत्त्व आ गया मुझमें और मैंने मानो दिशा भी पा ल...

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5 reviews
Hrishikesh Mishra
September 15, 2018
Very good book
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About the author

जन्म: 1907, फर्रुख़ाबाद (उ.प्र.)।

शिक्षा: मिडिल में प्रान्त-भर में प्रथम, इंट्रेंस प्रथम श्रेणी में, फिर 1927 में इंटर, 1929 में बी.ए., 1932 में प्रयाग विश्वविद्यालय से संस्कृत में एम.एम.किया।

गतिविधियाँ: प्रयाग महिला विद्यापीठ में प्रधानाचार्य और 1960 में कुलपति। ‘चाँद’ का सम्पादन। ‘विश्ववाणी’ के ‘युद्ध अंक’ का सम्पादन। ‘साहित्यकार’ का प्रकाशन व सम्पादन। नाट्य संस्थान ‘रंगवाणी’ की प्रयाग में स्थापना।

पुरस्कार: ‘नीरजा’ पर सेकसरिया पुरस्कार, ‘स्मृति की रेखाएँ’ पर द्विवेदी पदक, मंगलाप्रसाद पारितोषिक, उत्तर प्रदेश सरकार का विशिष्ट पुरस्कार, उ.प्र. हिन्दी संस्थान का ‘भारत भारती’ पुरस्कार, ज्ञानपीठ पुरस्कार।

उपाधियाँ: भारत सरकार की ओर से पद्मभूषण और फिर पद्मविभूषण अलंकरण। विक्रम, कुमाऊँ, दिल्ली, बनारस विश्वविद्यालयों से डी.लिट्. की उपाधि। साहित्य अकादमी की सम्मानित सदस्या रहीं।

कृति सन्दर्भ: अतीत के चलचित्र, शृंखला की कड़ियाँ, स्मृति की रेखाएँ, पथ के साथी (रेखाचित्र); क्षणदा, साहित्यकार की आस्था, संकल्पित (निबन्ध); मेरा परिवार (संस्मरण); सम्भाषण (भाषण); चिन्तन के क्षण (रेडियो वार्ता); नीहार, रश्मि, नीरजा, सांध्यगीत, दीपशिखा, प्रथम आयाम, अग्निरेखा, यात्रा (कविता-संग्रह)।

निधन: 11 सितम्बर, 1987

 

जन्म: 1907, फर्रुख़ाबाद (उ.प्र.)। शिक्षा: मिडिल में प्रान्त-भर में प्रथम, इंट्रेंस प्रथम श्रेणी में, फिर 1927 में इंटर, 1929 में बी.ए., 1932 में प्रयाग विश्वविद्यालय से संस्कृत में एम.एम.किया। गतिविधियाँ: प्रयाग महिला विद्यापीठ में प्रधानाचार्य और 1960 में कुलपति। ‘चाँद’ का सम्पादन। ‘विश्ववाणी’ के...

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