Dharm Aur Vishvadrishti

· Radhakrishna Prakashan
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यह किताब ई.वी. रामासामी नायकर ‘पेरियार’ के दार्शनिक व्यक्तित्व से परिचित कराती है। धर्म, ईश्वर और मानव समाज का भविष्य उनके दार्शनिक चिन्तन का केन्द्रीय पहलू रहा है। उन्होंने मानव समाज के सन्दर्भ में धर्म और ईश्वर की भूमिका पर गहन चिन्तन-मनन किया है। इस चिन्तन-मनन के निष्कर्षों को इस किताब के विविध लेखों में प्रस्तुत किया गया है। ये लेख पेरियार के दार्शनिक व्यक्तित्व के विविध आयामों को पाठकों के सामने रखते हैं। इनको पढ़ते हुए कोई भी सहज ही समझ सकता है कि पेरियार जैसे दार्शनिक-चिन्तक को महज नास्तिक कहना उनके गहन और बहुआयामी चिन्तन को नकारना है।

यह किताब दो खंडों में विभाजित है। पहले हिस्से में समाहित वी. गीता और ब्रजरंजन मणि के लेख पेरियार के चिन्तन के विविध आयामों को पाठकों सामने प्रस्तुत करते हैं। इसी खंड में पेरियार के ईश्वर और धर्म सम्बन्धी मूल लेख भी समाहित हैं जो पेरियार की ईश्वर और धर्म सम्बन्धी अवधारणा को स्पष्ट करते हैं।

दूसरे खंड में पेरियार की विश्वदृष्टि से सम्बन्धित लेखों को संगृहीत किया गया है जिसमें उन्होंने दर्शन, वर्चस्ववादी साहित्य आदि सवालों पर विचार किया है। इन लेखों में पेरियार विस्तार से बताते हैं कि दर्शन क्या है और समाज में उसकी भूमिका क्या है? इस खंड में वह ऐतिहासिक लेख भी शामिल है जिसमें पेरियार ने विस्तार से विचार किया है कि भविष्य की दुनिया कैसी होगी?

यह किताब ई.वी. रामासामी नायकर ‘पेरियार’ के दार्शनिक व्यक्तित्व से परिचित कराती है। धर्म, ईश्वर और मानव समाज का भविष्य उनके दार्शनिक चिन्तन का केन्द्रीय पहलू रहा है। उन्होंने मानव समाज के सन्दर्भ में धर्म और ईश्वर की भूमिका पर गहन चिन्तन-मनन किया है। इस चिन्तन-मनन के निष्कर्षों को इस किताब के विवि...

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Ratings and reviews

6 reviews
Shivam Shukla
August 11, 2023
पेरियार एक गधा व्यक्ति था वह एक anti-hindu व्यक्ति था साले को संस्कृत नहीं आती थी जिसने खुद अपनी बेटी से 70 साल की उम्र में शादी की हो बो कितना ज्ञानी व्यक्ति होगा लौड़ा पेरियार
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Ambrish Bauddh
May 13, 2022
very nice book
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Urmila Choudhary
April 23, 2024
right
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