कर्ज चुकाने में असमर्थ होने पर रमानाथ अपने दफ्तर से गबन कर भाग जाता है और पुलिस के चंगुल में फंसकर मुखबिर बनने को मजबूर होता है। वहीं, जालपा गहनों के प्रति अपनी शुरुआती चाहत को त्यागकर एक मजबूत और दृढ़निश्चयी महिला के रूप में उभरती है, जो अपने पति को मुश्किलों से निकालने का प्रयास करती है।
यह उपन्यास केवल एक व्यक्तिगत गाथा नहीं है, बल्कि तत्कालीन समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार, भौतिकवाद और दिखावे की प्रवृत्ति पर गहरा व्यंग्य है। प्रेमचंद ने इसमें नारी सशक्तिकरण और मानवीय संबंधों की महत्ता को भी दर्शाया है, जो इसे आज भी प्रासंगिक बनाता है।
मुंशी प्रेमचंद (31 जुलाई 1880 - 8 अक्टूबर 1936) की जीवनी एक ऐसे महान भारतीय लेखक की संक्षिप्त जीवन गाथा है जो अपनी आधुनिक हिन्दी-उर्दू साहित्य की रचनाओं के लिये प्रख्यात हैं। वे भारतीय उपमहाद्वीप के सर्वाधिक प्रसिद्ध लेखक थे और बीसवीं सदी के पूर्वाह्न केे भारतीय लेखकों में सर्वाधिक अग्रणी लेखकों में से एक माने जाते हैं। वे एक ऐसे उपन्यासकार, कथाकार एवं नाटककार थे जिन्हें साहित्यविदों द्वारा ‘उपन्यास सम्राट’ के नाम से संबोधित किया जाता है। उनकी रचनाओं में एक दर्जन से अधिक उपन्यास, प्रायः 300 लघु कथाएं, अनेक निबंध और विदेशी साहित्यिक रचनाओं के कई अनुवाद भी शामिल हैं। पुस्तक में इस महान रचनाकार के जीवन का एक दीप्तिमान वर्णन है कि कैसे एक साधारण-सा व्यक्ति, जो निर्धन पैदा हुआ और निर्धन ही मृत्यु को प्राप्त हुआ, अपनी असाधारण लेखनी द्वारा भारतीय साहित्य को अत्यंत समृद्ध बना गया। यदि उन्हें आधुनिक भारत का स कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी।.