प्रेमचंद के रंगभूमि का केंद्र बिंदु है साम्राज्यवादी शासन, पूँजीवादी स्वार्थ और ग्रामीण भारत की पीड़ित जनता के बीच संघर्ष। उपन्यास का नायक सूरदास, एक नेत्रहीन भिखारी होते हुए भी अदम्य साहस, नैतिक दृढ़ता और सत्य की शक्ति का प्रतीक है। वह अपने गाँव की जमीन को अंग्रेज़ अफ़सरों और धनी उद्योगपतियों द्वारा दबाए जाने का विरोध करता है। सूरदास की आवाज़ भले कमजोर हो, पर उसका सत्य सभी सत्ताधारी शक्तियों को चुनौती देता है। उपन्यास में साम्प्रदायिकता, जातिगत भेदभाव, महिलाओं की स्थिति और समाज में उभरते औद्योगीकरण के दुष्परिणाम भी उभरकर आते हैं। प्रेमचंद मानवता, करुणा, संघर्ष और सामाजिक न्याय को प्रमुख स्थान देते हुए दिखाते हैं कि वास्तविक शक्ति जन-साधारण की एकता और नैतिकता में है, न कि धन और सत्ता में। रंगभूमि अन्याय के विरुद्ध मानव आत्मा की अडिग प्रतिरोध-गाथा है।
प्रेमचंद के रंगभूमि का केंद्र बिंदु है साम्राज्यवादी शासन, पूँजीवादी स्वार्थ और ग्रामीण भारत की पीड़ित जनता के बीच संघर्ष। उपन्यास का नायक सूरदास, एक नेत्रहीन भिखारी होते हुए भी अदम्य साहस, नैतिक दृढ़ता और सत्य की शक्ति का प्रतीक है। वह अपने गाँव की जमीन को अंग्रेज़ अफ़सरों और धनी उद्योगपतियों द्...