रेलवे ट्रैक…
और एक जंगल, जहाँ भागते हुए प्रीतम की ज़िंदगी खत्म हो जाती है।
लेकिन कहानी वहीं खत्म नहीं होती।
एक महीने बाद, उसी जंगल और खेतों के आसपास अजीब घटनाएँ शुरू हो जाती हैं।
आकाश और विकास को महसूस होने लगता है कि जिसे उन्होंने मरा समझा था,
वो अब साया बनकर लौट आया है।
लाल आँखें, डरावनी परछाइयाँ, आधी रात को जलता-बुझता बल्ब
और एक ऐसा डर जो नींद, हँसी और ज़िंदगी — सब छीन लेता है।
डर से बचने के लिए दोनों पहुँचते हैं
श्मशान में रहने वाले रहस्यमयी बाबा रंगीला के पास।
लेकिन भूत से छुटकारा पाने की कीमत सिर्फ़ पैसे नहीं होती —
उसे सच चाहिए…
और वो सच एक ऐसे नाम से जुड़ा है
जिसका ज़िक्र होते ही सब कुछ बदल जाता है।
सिमरन।
ये कहानी है
अपराध, बदले, डर और उन गलतियों की
जो मौत के बाद भी पीछा नहीं छोड़तीं।
क्या भूत सच में बदला लेने लौटता है?
या हर डर के पीछे कोई ज़िंदा सच्चाई छुपी होती है?
अगर आपको डार्क हॉरर, सस्पेंस और तेज़ रफ्तार कहानी पसंद है,
तो यह किताब आपको आख़िरी पन्ने तक बाँधे रखेगी।
Shyo Kaswan एक कहानीकार हैं, जिन्हें डर, रहस्य और सस्पेंस से भरी कहानियाँ लिखना पसंद है।
उनकी कहानियों में अँधेरा, बदला, इंसानी गलतियाँ और उनके खौफनाक नतीजे साफ़ दिखाई देते हैं।
ग्रामीण माहौल, जंगल, रात और मनोवैज्ञानिक डर उनकी लेखन शैली की पहचान है।
यह किताब उनकी उन कहानियों में से एक है,
जो पाठक को आख़िरी पन्ने तक बाँधे रखती है और यह सोचने पर मजबूर करती है कि
डर सिर्फ़ दिखता नहीं — वो पीछा भी करता है।