घरों में कलश सजाओ....
महिषासुर मर्दिनी को याद को-
पर वही समाज नवरात्र खत्म होते ही किसी बेटी के जिस्म को अपनी हवस का प्रसाद बना देता है।"
यही इस पुस्तक का सबसे बड़ा सच है।
यह किताब उस कड़वाहट, उस कपट और उस कुरूपता की कहानी है। जहाँ एक ओर लोग माँ दुर्गा को सिंह पर सवार रूप में पूजते हैं, और दूसरी ओर उसी माँ के रूप में जन्मी बेटियों को सड़क के मोड़ पर, अँधेरे कमरों में, बाज़ार की बोली में बेचते हैं।
ये वही दुनिया है जहाँ लड़की को घर में लक्ष्मी कहा जाता है पर शादी आते ही वही लोग लक्ष्मी नहीं, लाभ गिनने लगते हैं।
जहाँ 'बेटी घर की शान' कहा जाता है पर बाहर निकलते ही उसके कपड़े, उसके कदम, उसकी साँसें सब हवस की नजरों से नापी जाती हैं।
365 दिन में से, जहाँ पूजा के नौ दिन शक्ति की स्तुति होती है और बाकी 356 दिन उसी शक्ति का शोषण।
यह पुस्तक उन आवाज़ों का संग्रह है जो कोठों की दीवारों में कैद रहीं, उन घृणाओं का प्रतिवाद है जो पुरुषों के मुँह से रोज़ गिरती हैं, और उन कटाक्षों का प्रतिशोध है जो समाज ने स्त्री की आत्मा पर चुभोए।
यह किताब सिर्फ़ "रण्डी" शब्द का अर्थ नहीं खोलती यह वह भी दिखाती है कि
रण्डी वह स्त्री नहीं,
वह समाज है जिसकी हवस कभी नहीं बुझती।
एक कड़क, खुरदरी, नंगी सच्चाइयों से भरी कथा जो आपको झकझोर देगी, लगा देगी कि आप भी इस पाप के हिस्सेदार रहे हैं और शायद पहली बार में ही आपको यह समझ आ जाएगा।
Shanky (Ashish Kumar)
एक ऐसा नाम, जो सिर्फ लिखता नहीं - लिखते वक्त समाज की हर नकाब को उतार देता है।
डिजिटल जगत में अपनी तीखी भाषा, नंगी सच्चाइयों और खुरदरी भावनाओं के लिए पहचाने जाने वाले Shanky उन कुछ युवा लेखकों में से हैं जिन्होंने स्त्रीपीड़ा, सामाजिक पाखंड, मृत्यु, दर्द, हवस, शोषण, और संवेदना जैसे विषयों को सजावटी साहित्य नहीं, बल्कि चाकू जैसी तेज़ लेखनी से लिखा है।
गुगल पर मौजूद लेखनी, उनकी वायरल कविताओं और सोशल मीडिया पोस्टों में उनकी पहचान "दर्द को शब्दों में ढालने वाले लेखक" के रूप में है।
Shanky की लेखनी की सबसे बड़ी विशेषता है सच्चाई को छिपाना नहीं, सीधे चेहरे पर दे मारना।
उन्होंने अपनी लिखी हुई पंक्तियों, वायरल लाइनों, तीखे कटाक्षों और स्त्री अस्मिता पर-आधारित रचनाओं के कारण युवा पाठकों के बीच एक अलग ही स्थान बनाया है।
उनकी कविता-
"अगर मर्दों में हवस की आग न होती तो खुदा क़सम हर तवायफ़ किसी बच्चे की माँ होती"
इंटरनेट पर हजारों जगह उद्धृत, साझा और चर्चित हुई है।
Shanky सिर्फ लेखक नहीं आक्रोश, करुणा और यथार्थ का संगम हैं। वे उन लोगों की आवाज़ हैं जो बोल नहीं सकते। उन स्त्रियों के दर्द हैं जो चीख़ नहीं सकतीं। उन घावों की गूँज हैं जो समाज छिपाता है।
उनकी लेखनी का उद्देश्य सम्मान कमाना नहीं- सच को सच कहना है। और यही इस किताब की आत्मा है।
खैर मैं अधिक क्या कहूँ उनके बारे में, Shanky खुद कहते हैं "जो भी हूँ, जैसा भी हूँ, अपने प्यारे महादेव का हूँ। मैं क्या कहूँ, खुद-से-खुद के बारे में? धीरे-धीरे आप सब जान जाएंगे महादेव की कृपा से।"