
Pradeep Tripathi
I recently bought the hard copy of this book, and I must say,it’s truly impressive. What I liked most was the unique perspective through which the author has portrayed the emotions of families whose sons were part of the Kurukshetra war. It adds a deeply human and heartfelt dimension to a story we’ve all known. I’m sure anyone who reads it will feel the same. Kudos to Hemant Joshi for his exceptional writing skills and remarkable command over Hindi. Truly a brilliant piece of work.

Naveen Chandra joshi
सुभद्रा का मकरंद एक प्रभावशाली कृति है, जो महाभारत के भीषण युद्ध को नए तरीके से प्रस्तुत करती है। सामान्यतः महाभारत की कहानियाँ वीरता, नीति और धर्म-अधर्म के टकराव के इर्द-गिर्द घूमती हैं, लेकिन यह पुस्तक युद्ध के उस पहलू को उजागर करती है, जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। यह आम नागरिक पर युद्ध का प्रभाव है। कहानी का केंद्र एक 16 वर्षीय किशोर है, जिसकी स्थिति बेहद जटिल है। उसका पिता और वह स्वयं कौरव पक्ष में हैं, जबकि उसका मामा पांडव पक्ष में है। इस प्रकार, उसका परिवार युद्धभूमि में बंट जाता है। लेखक इस पात्र के जरिए दिखाना चाहते हैं कि युद्ध केवल रणभूमि में नहीं, बल्कि मन और रिश्तों के भीतर भी लड़ा जाता है। पुस्तक का एक महत्वपूर्ण पात्र “मकरंद” है, जो युद्धभूमि में एक अलग प्रकार की भूमिका निभाता है। वह पारंपरिक योद्धा नहीं है, लेकिन उसकी उपस्थिति और दृष्टिकोण युद्ध की क्रूरता और मानवीय संवेदनाओं को गहराई से दिखाते हैं। मकरंद का चरित्र पाठक को सोचने पर मजबूर करता है कि क्या हर युद्ध वास्तव में न्याय के लिए होता है, या इसके पीछे कुछ और सचाई छिपी होती है। लेखक हेमंत जोशी ने श्रीकृष्ण के संवादों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया है। व्याख्या केवल कथा को गहराई नहीं देती, बल्कि पाठक को आत्ममंथन के लिए भी प्रेरित करती है। उनका समझाने का तरीका सरल एवं गूढ़ है, जो प्रेरणादायक भी है। भाषा शैली सरल, प्रवाहपूर्ण और भावनात्मक है। यह पाठक को कथा से जोड़े रखती है। लेखक ने युद्ध के दृश्य, मानसिक द्वंद्व और पारिवारिक विखंडन को अत्यंत जीवंत तरीके से चित्रित किया है। सुभद्रा का मकरंद केवल एक कृति नहीं है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं, रिश्तों और युद्ध की वास्तविकता का गहरा विश्लेषण है। यह पुस्तक पाठकों को नई दृष्टि देती है और उन्हें सोचने पर मजबूर करती है कि युद्ध का असली मूल्य क्या है। यह कृति विशेष रूप से उन पाठकों के लिए उपयोगी है, जो महाभारत को नए और मानवीय तरीके से समझना चाहते हैं। नवीन चन्द्र जोशी