वासनाएँ कविता-संग्रह, पूर्व प्रकाशित कविता-संग्रह धुंधला अतीत की ही आगे बढ़ती हुई धारा है। इन कविताओं में लेखक के निजी जीवन और समाज के बीच का द्वंद्व, और उनसे अलग होने की एक मौन कोशिश स्पष्ट झलकती है। लंबे समय तक मुंबई की भाग-दौड़ भरी दुनिया में रहने के बाद, वह अचानक अपनी नौकरी से इस्तीफ़ा देकर खेतों, जंगलों और अपने घर की ओर लौट आता है। मन में पहले से पल रहीं कुछ वासनाएँ ही उसे इस कविता-संग्रह को रचने के लिए विवश करती हैं। साथ ही, आने वाला जीवन-जिसकी तलाश में वह स्वयं निकला है – इन कविताओं में धीरे-धीरे आकार लेता है। आशा है कि यह कविता-संग्रह पाठक को कुछ क्षण ठहरने पर मजबूर करेगा और उसके भीतर कुछ अनकहे प्रश्न जगा देगा।
वासनाएँ कविता-संग्रह, पूर्व प्रकाशित कविता-संग्रह धुंधला अतीत की ही आगे बढ़ती हुई धारा है। इन कविताओं में लेखक के निजी जीवन और समाज के बीच का द्वंद्व, और उनसे अलग होने की एक मौन कोशिश स्पष्ट झलकती है। लंबे समय तक मुंबई की भाग-दौड़ भरी दुनिया में रहने के बाद, वह अचानक अपनी नौकरी से इस्तीफ़ा देकर ख...