Professor Shanku Ke Karname

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प्रोफेसर शंकू के कारनामे प्रोफेसर शंकू कौन है? बस, इतना ही पता चलता है कि वे एक वैज्ञानिक हैं, विश्वविख्यात वैज्ञानिक! कुछ लोग कहते हैं कि उन्होंने शायद किसी भीषण प्रयोग में अपने प्राण गँवा दिये हैं। इधर यह भी सुनने में आया है कि वे किसी अपरिचित अंचल में छुप कर अपने काम में लगे हुए हैं, समय आने पर प्रकट हो जाएँगे। प्रोफेसर शंकू की प्रत्येक डायरी में कुछ-न-कुछ ऐसी विचित्र जानकारियाँ अंकित हैं जो हमें रोमांचित करती हैं। ये कहानियाँ सच्ची हैं या झूठी, सम्भव हैं या असम्भव - इसका निर्णय आप स्वयं पढ़कर कर लें। रोचक शैली में लिखा गया सत्यजीत राय का बहुचर्चित-बहुप्रशंसित उपन्यास है - प्रोफेसर शंकू के कारनामे।
प्रोफेसर शंकू के कारनामे प्रोफेसर शंकू कौन है? बस, इतना ही पता चलता है कि वे एक वैज्ञानिक हैं, विश्वविख्यात वैज्ञानिक! कुछ लोग कहते हैं कि उन्होंने शायद किसी भीषण प्रयोग में अपने प्राण गँवा दिये हैं। इधर यह भी सुनने में आया है कि वे किसी अपरिचित अंचल में छुप कर अपने काम में लगे हुए हैं, समय आने प...

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Acerca del autor

सत्यजित राय 2 मई, 1921 को गड़पार रोड, दक्षिणी कलकत्ता (बंगाल) में जन्म। पिता सुकुमार राय एक प्रतिष्ठित व्यक्ति थे। प्रारम्भिक शिक्षा घर पर हुई। पाँच साल की आयु में माँ सुप्रभा राय के साथ भवानीपुर में नाना के घर जाकर रहने लगे। सन् 1936 में बालीगंज गवर्नमेंट हाई स्कूल से मैट्रिक पास किया। बांग्ला फ़िल्मों के अन्तरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त निदेशक होने के साथ-साथ उच्च कोटि के संगीतकार, चित्रकार, छायाकार, पत्रकार और लेखक। बच्चों के लिए विशेष तौर पर काम किया है। 'पथेर पांचाली' उनकी विश्वप्रसिद्ध बांग्ला फ़िल्म है। हिन्दी सिनेमा को भी उन्होंने 'सद्गति' और 'शतरंज के खिलाड़ी' जैसी फ़िल्म दीं। अपनी कला-मर्मज्ञता के कारण वे कई उच्चस्तरीय राष्ट्रीय व अन्तरराष्ट्रीय समितियों के पदाधिकारी रहे। ऑस्कर समेत अनेक पुरस्कारों से सम्मानित। निधन : 23 अप्रैल, 1992
सत्यजित राय 2 मई, 1921 को गड़पार रोड, दक्षिणी कलकत्ता (बंगाल) में जन्म। पिता सुकुमार राय एक प्रतिष्ठित व्यक्ति थे। प्रारम्भिक शिक्षा घर पर हुई। पाँच साल की आयु में माँ सुप्रभा राय के साथ भवानीपुर में नाना के घर जाकर रहने लगे। सन् 1936 में बालीगंज गवर्नमेंट हाई स्कूल से मैट्रिक पास किया। बांग्ला फ़...

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