‘व्यापार’ ही एक ऐसी चीज है; जिसने इस दुनिया में सबसे ज्यादा रंक से राजा बनाए हैं। पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को चलाने में; लोगों के जीवन का पालन-पोषण करने में; इस दुनिया को बेहतर बनाने में सबसे महत्त्वपूर्ण योगदान किसी का है तो वह ‘व्यापार’ का ही है। ‘व्यापार’ एक सदैव गतिशील रहनेवाली प्रक्रिया है; जो सरहदों को मिटाती है; दिलों को एक करती है।
सभी व्यापारी भिन्न-भिन्न परिस्थितियों से अपने जीवन में आगे आए; कोई अत्यंत दुर्दम्य गरीबी में से आगे आया तो कोई अत्यंत धनवान परिवार में पैदा हुआ; तो कोई अपने ज्ञान के बलबूते पर अपनी किस्मत बदलने में सक्षम हुआ। पर इन सब में एक बात समान थी; वह थी—जिद। परिस्थितियों को बदलकर रखने की; कुछ कर गुजरने की जिद। अपने परिश्रम; नवाचार; कर्मठता और दूरदर्शिता से इन्होंने यह सिद्ध कर दिया कि हिम्मत से परिस्थितियाँ बदली जा सकती हैं। कई ऐसे उत्पादों का इन्होंने निर्माण किया; जिनके बगैर हम आज अपने जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकते। इन कर्मयोगियों ने पूरेविश्व को जीने की राह बताई है। उद्यमशीलता के मूल-मंत्र से अनुप्राणित यह पुस्तक पाठकों को भी इस क्षेत्र में सफल होने के लिए प्रेरित करेगी और इन कर्मयोगी व्यापारियों के कर्तव्य के प्रति नतमस्तक कर देगी।
जीवन को नई दिशा देनेवाली इन प्रेरक कर्मयोगियों की गाथा पाठकों के जीवन में भी नई आशा का संचार करेगी तथा व्यापार उद्यमिता की मशाल हजारों-लाखों पाठकों के दिलों में जलाएगी।
‘व्यापार’ ही एक ऐसी चीज है; जिसने इस दुनिया में सबसे ज्यादा रंक से राजा बनाए हैं। पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को चलाने में; लोगों के जीवन का पालन-पोषण करने में; इस दुनिया को बेहतर बनाने में सबसे महत्त्वपूर्ण योगदान किसी का है तो वह ‘व्यापार’ का ही है। ‘व्यापार’ एक सदैव गतिशील रहनेवाली प्रक्रिया ह...