Pakistan Mail

· Rajkamal Prakashan
28 reviews
Ebook
208
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पाकिस्तान मेल -- भारत-विभाजन की त्रासदी पर केंद्रित पाकिस्तान मेल सुप्रसिद्ध अंग्रेजी उपन्यासकार खुशवंत सिंह का अत्यंत मूल्यवान उपन्यास है। सन् 1956 में अमेरिका के ‘ग्रोव प्रेस एवार्ड’ से पुरस्कृत यह उपन्यास मूलतः उस अटूट लेखकीय विश्वास का नतीजा है, जिसके अनुसार अंततः मनुष्यता ही अपने बलिदानों में जीवित रहती है। घटनाक्रम की दृष्टि से देखें तो 1947 का भयावह पंजाब! चारों ओर हजारों-हजार बेघर-बार भटकते लोगों का चीत्कार! तन-मन पर होनेवाले बेहिसाब बलात्कार और सामूहिक हत्याएँ! लेकिन मजहबी वहशत का वह तूफान मनो-माजरा नामक एक गाँव को देर तक नहीं छू पाया; और जब छुआ भी तो उसके विनाशकारी परिणाम को इमामबख्श की बेटी के प्रति जग्गा के बलिदानी प्रेम ने उलट दिया। उपन्यास के कथाक्रम को एक मानवीय उत्स तक लाने में लेखक ने जिस सजगता का परिचय दिया है, उससे न सिर्फ उस विभीषिका के पीछे क्रियाशील राजनीतिक और प्रशासनिक विरूपताओं का उद्घाटन होता है, बल्कि मानव-चरित्र से जुड़ी अच्छाई-बुराई की परंपरागत अवधारणाएँ भी खंडित हो जाती हैं। इसके साथ ही उसने धर्म के मानव-विरोधी फलसफे और सामाजिक बदलाव से प्रतिबद्ध बौद्धिक छद्म को भी उघाड़ा है। संक्षेप में कहें तो अंग्रेजी में लिखा गया खुशवंत सिंह का यह उपन्यास भारत-विभाजन को एक गहरे मानवीय संकट के रूप में चित्रित करता है; और अनुवाद के बावजूद उषा महाजन की रचनात्मक क्षमता के कारण मूल-जैसा रसास्वादन भी कराता है।
पाकिस्तान मेल -- भारत-विभाजन की त्रासदी पर केंद्रित पाकिस्तान मेल सुप्रसिद्ध अंग्रेजी उपन्यासकार खुशवंत सिंह का अत्यंत मूल्यवान उपन्यास है। सन् 1956 में अमेरिका के ‘ग्रोव प्रेस एवार्ड’ से पुरस्कृत यह उपन्यास मूलतः उस अटूट लेखकीय विश्वास का नतीजा है, जिसके अनुसार अंततः मनुष्यता ही अपने बलिदानों मे...

Ratings and reviews

28 reviews
Manish Tomar
May 7, 2014
One of the most readable book i have ever read! Khuswant Singh at his best!!
32 people found this review helpful
Did you find this helpful?
OM SHANKAR SUMAN
January 20, 2018
Best novel
30 people found this review helpful
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Dhananjay Singh
April 13, 2021
good
17 people found this review helpful
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About the author

जन्म: 15 अगस्त, 1915, हडाली (संप्रति, पाकिस्तान में)। शिक्षा: लाहौर से स्नातक तथा किंग्स कॉलेज, लंदन से एल.एल.बी.। उपलब्धियाँ: 1939 से 1947 तक लाहौर हाईकोर्ट में वकालत की। विभाजन के बाद भारत की ‘राजनयिक सेवा’ के अंतर्गत कनाडा में ‘इन्प़$ॉर्मेशन अफ़सर’ तथा इंग्लैंड में भारतीय उच्चायुक्त के ‘प्रेस अटैची’ रहे। कुछ वर्षों तक प्रिंस्टन तथा स्वार्थमोर विश्वविद्यालयों में अध्यापन भी किया। भारत लौटकर नौ वर्षों तक इलस्ट्रेटेड वीकली तथा तीन वर्षों तक हिंदुस्तान टाइम्स का कुशल संपादन किया। 1980 में राज्यसभा के सदस्य मनोनीत हुए। 1974 में पर्भिंूषण की उपाधि मिली, जिसे ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ के खिलाफ गुस्सा जताते हुए लौटा दिया। तीस से अधिक पुस्तकें लिख चुके हैं, जिनमें प्रमुख हैं: ट्रेन टु पाकिस्तान, हिस्ट्री ऑफ सिख्स के दो खंड तथा रंजीत सिंह। एक और उपन्यास, चार कहानी-संग्रहों तथा अनेक लेखमालाओं के अतिरिक्त उर्दू और पंजाबी में कई अनुवाद भी किए। संप्रति: हिंदुस्तान टाइम्स तथा संडे के लिए नियमित रूप से क्रमशः ‘विद मैलिस टुवर्ड्स वन एंड ऑल’ एवं ‘गॉसिप, स्वीट एंड सॉर’ लिखते हैं तथा ‘पेंगुइन बुक्स कंपनी इंडिया’ में सलाहकार संपादक के पद पर कार्यरत हैं।
जन्म: 15 अगस्त, 1915, हडाली (संप्रति, पाकिस्तान में)। शिक्षा: लाहौर से स्नातक तथा किंग्स कॉलेज, लंदन से एल.एल.बी.। उपलब्धियाँ: 1939 से 1947 तक लाहौर हाईकोर्ट में वकालत की। विभाजन के बाद भारत की ‘राजनयिक सेवा’ के अंतर्गत कनाडा में ‘इन्प़$ॉर्मेशन अफ़सर’ तथा इंग्लैंड में भारतीय उच्चायुक्त के ‘प्रेस ...

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