Kasap

· Rajkamal Prakashan
16 ຄຳຕິຊົມ
ປຶ້ມອີບຸກ
312
ໜ້າ

ກ່ຽວກັບປຶ້ມ e-book ນີ້

कसप मनोहरश्याम जोशी वस्तुतः एक प्रेम-कथा है ‘कसप’। भाषा की दृष्टि से कुछ नवीनता लिए हुए। कुमाऊँनी के शब्दों से सजी ‘कसप’ की हिन्दी चमत्कृत करती है। इसी कुमाऊँनी मिश्रित हिन्दी में मनोहरश्याम जोशी ने कुमाऊँनी जीवन का चित्ताकर्षक चित्र उकेरा है - ‘कसप’ में। समीक्षकों ने ‘कसप’ को प्रेमाख्यानों में अज्ञेय के उपन्यास ‘नदी के द्वीप’ के बाद की सबसे बड़ी उपलब्धि कहा है। ‘कसप’ मूलतः एक ऐसा उपन्यास है जिसमें मध्यवर्गीय मानसिकता, कुलांचे भरती है। इसका दार्शनिक ढाँचा भी मध्यमवर्गीय यथार्थ पर टिका है। यही वह बिन्दु है जहाँ ‘कसप’ अपने तेवर में ‘नदी के द्वीप’ से अलग ठहरता है। ‘नदी के द्वीप’ का तेवर बौद्धिक और उच्चवर्गीय है, जबकि ‘कसप’ एक ऐसा प्रेमाख्यान है जिसमें ‘दलिद्दर’ से लेकर ‘दिव्य’ तक का स्वर ‘मध्य’ पर ही ठहरता है और इस उपन्यास को सरसता, भावुकता और ग़ज़ब की पठनीयता से लवरेज करता है। इस उपन्यास में मध्यवर्गीय जीवन की टीस को अपने पंडिताऊ परिहास में ढालकर एक प्राध्यापक ने मानवीय प्रेम को स्वप्न और स्मृत्याभास के बीचोबीच ‘फ्रीज’ कर दिया है। 1910 के काशी से लेकर 1980 के हॉलीवुड तक की अनुगूँजों से भरा, गँवई, अनाथ, भावुक साहित्य-सिनेमा अनुरागी लड़के और काशी के समृद्ध शास्त्रियों की सिरचढ़ी, खिलन्दड़, दबंग लड़की के संक्षिप्त प्रेम की विस्तृत कहानी सुनानेवाला यह उपन्यास एक विचित्र-सा उदास-उदास, मीठा-मीठा-सा प्रभाव मन पर छोड़ता है। ऐसा प्रभाव जो ठीक कैसा है, यह पूछे जाने पर एक ही उत्तर सूझता है - ‘कसप!...और कुमाऊँनी में ‘कसप’ का मतलब होता है - ‘पता नहीं!’
कसप मनोहरश्याम जोशी वस्तुतः एक प्रेम-कथा है ‘कसप’। भाषा की दृष्टि से कुछ नवीनता लिए हुए। कुमाऊँनी के शब्दों से सजी ‘कसप’ की हिन्दी चमत्कृत करती है। इसी कुमाऊँनी मिश्रित हिन्दी में मनोहरश्याम जोशी ने कुमाऊँनी जीवन का चित्ताकर्षक चित्र उकेरा है - ‘कसप’ में। समीक्षकों ने ‘कसप’ को प्रेमाख्यानों में अ...

ຄົ້ນພົບເພີ່ມເຕີມ

ການຈັດອັນດັບ ແລະ ຄຳຕິຊົມ

16 ຄຳຕິຊົມ

ກ່ຽວກັບຜູ້ຂຽນ

जन्म: 9 अगस्त, 1933 को अजमेर में। लखनऊ विश्वविद्यालय के विज्ञान स्नातक मनोहर श्याम जोशी ‘कल के वैज्ञानिक’ की उपाधि पाने के बावजूश्द रोजी-रोटी की खातिर छात्र जीवन से ही लेखक और पत्रकार बन गए। अमृतलाल नागर और अज्ञेय - इन दो आचार्यों का आशीर्वाद उन्हें प्राप्त हुआ। स्कूल मास्टरी, क्लर्की और बेरोजगारी के अनुभव बटोरने के बाद 21 वर्ष की उम्र से वह पूरी तरह मसिजीवी बन गए। प्रेस, रेडियो, टी.वी. वृत्तचित्र, फिल्म, विज्ञापन-सम्प्रेषण का ऐसा कोई माध्यम नहीं जिसके लिए उन्होंने सफलतापूर्वक लेखन-कार्य न किया हो। खेल-कूद से लेकर दर्शनशास्त्र तक ऐसा कोई विषय नहीं जिस पर उन्होंने कलम न उठाई हो। आलसीपन और आत्मसंशय उन्हें रचनाएँ पूरी कर डालने और छपवाने से हमेशा रोकता रहा है। पहली कहानी तब छपी जब वह अठारह वर्ष के थे लेकिन पहली बड़ी साहित्यिक कृति तब प्रकाशित करवाई जब सैंतालीस वर्ष के होने को आए। केन्द्रीय सूचना सेवा और टाइम्स ऑफ इंडिया समूह से होते हुए सन् ’67 में हिन्दुस्तान टाइम्स प्रकाशन में साप्ताहिक हिन्दुस्तान के संपादक बने और वहीं एक अंग्रेजी साप्ताहिक का भी संपादन किया। टेलीविजन धारावाहिक ‘हम लोग’ लिखने के लिए सन् ’84 में संपादक की कुर्सी छोड़ दी और तब से आजीवन स्वतंत्र लेखन करते रहे। प्रकाशित कृतियाँ: कुरु-कुरु स्वाहा, कसप, हरिया हरक्यूलीज की हैरानी, हमज़ाद, क्याप, ट-टा प्रोफेसर (उपन्यास); नेताजी कहिन (व्यंग्य); बातों-बातों में (साक्षात्कार); एक दुर्लभ व्यक्तित्व, कैसे किस्सागो, मन्दिर घाट की पैड़ियाँ (कहानी-संग्रह); आज का समाज (निबंध); पटकथा लेखन: एक परिचय (सिनेमा)। टेलीविजन धारावाहिक: हम लोग, बुनियाद, मुंगेरीलाल के हसीन सपने, कक्काजी कहिन, हमराही, जमीन-आसमान। फिल्म: भ्रष्टाचार, अप्पू राजा और निर्माणाधीन जमीन। सम्मान: उपन्यास क्याप के लिए वर्ष 2005 के साहित्य अकादेमी पुरस्कार सहित शलाका सम्मान (1986-87); शिखर सम्मान (अट्ठहास, 1990); चकल्लस पुरस्कार (1992); व्यंग्यश्री सम्मान (2000) आदि अनेक सम्मान प्राप्त।
जन्म: 9 अगस्त, 1933 को अजमेर में। लखनऊ विश्वविद्यालय के विज्ञान स्नातक मनोहर श्याम जोशी ‘कल के वैज्ञानिक’ की उपाधि पाने के बावजूश्द रोजी-रोटी की खातिर छात्र जीवन से ही लेखक और पत्रकार बन गए। अमृतलाल नागर और अज्ञेय - इन दो आचार्यों का आशीर्वाद उन्हें प्राप्त हुआ। स्कूल मास्टरी, क्लर्की और बेरोजगार...

ໃຫ້ຄະແນນ e-book ນີ້

ບອກພວກເຮົາວ່າທ່ານຄິດແນວໃດ.

ອ່ານ​ຂໍ້​ມູນ​ຂ່າວ​ສານ

ສະມາດໂຟນ ແລະ ແທັບເລັດ
ຕິດຕັ້ງ ແອັບ Google Play Books ສຳລັບ Android ແລະ iPad/iPhone. ມັນຊິ້ງຂໍ້ມູນໂດຍອັດຕະໂນມັດກັບບັນຊີຂອງທ່ານ ແລະ ອະນຸຍາດໃຫ້ທ່ານອ່ານທາງອອນລາຍ ຫຼື ແບບອອບລາຍໄດ້ ບໍ່ວ່າທ່ານຈະຢູ່ໃສ.
ແລັບທັອບ ແລະ ຄອມພິວເຕີ
ທ່ານສາມາດຟັງປຶ້ມສຽງທີ່ຊື້ໃນ Google Play ໂດຍໃຊ້ໂປຣແກຣມທ່ອງເວັບຂອງຄອມພິວເຕີຂອງທ່ານໄດ້.
eReaders ແລະອຸປະກອນອື່ນໆ
ເພື່ອອ່ານໃນອຸປະກອນ e-ink ເຊັ່ນ: Kobo eReader, ທ່ານຈຳເປັນຕ້ອງດາວໂຫຼດໄຟລ໌ ແລະ ໂອນຍ້າຍມັນໄປໃສ່ອຸປະກອນຂອງທ່ານກ່ອນ. ປະຕິບັດຕາມຄຳແນະນຳລະອຽດຂອງ ສູນຊ່ວຍເຫຼືອ ເພື່ອໂອນຍ້າຍໄຟລ໌ໄໃສ່ eReader ທີ່ຮອງຮັບ.