Is Umra Mein

· Rajkamal Prakashan
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हिन्दी साहित्य के शिखर रचनाकार श्रीलाल शुक्ल की नई कहानियों का संग्रह है 'इस उम्र में'! यह एक अप्रतिम लेखक की अपने सामाजिक यथार्थ पर अचूक पकड़ और उसे बयान करने की उसकी अदभुत कला का साक्ष्य है। उसकी कहानियाँ हिन्दी कहानी की रूढिय़ों, फामूर्लों, खाद्यानों से दूर खड़ी हैं और रचना के संसार में नई निर्मितियाँ तैयार कर रही हैं। 'इस उम्र में' की कहानियाँ तीक्ष्ण अन्वीक्षण क्षमता से सम्पन्न होकर भारतीय समाज की गहन मीमांसा करती हैं। इनमें मौजूदा समय में प्रकट हो रहे नये बदलावों की संवेदनात्मक आहटें हैं। यहाँ तक कि कई समसामयिक घटनाएँ, प्रवृत्तियाँ और रुझान भी दर्ज हैं। न केवल इतना, श्रीलाल शुक्ल ने सामाजिक संरचना में तेजी से उभर रहीं नई शक्तियों के प्रतिरोध और परिवर्तन को भी पहचान कर उसे प्रकट किया है। 'इस उम्र में' की कहानियों में कई बार चली आ रही वास्तविकता को नई जीवनदृष्टि से उलट-पुलट जाती हैं तो कई बार नई पीड़ाओं, दुखों और क्रूरताओं को पुरानी धारणाओं के प्रहसनात्मक विखंडन के जरिए उजागर किया गया है। श्रीलाल शुक्ल यहाँ अभिव्यक्ति के नयु पुराने रूपों में ऐसी बेमुखरौव्वत तोड़-फोड़ करते हैं, फिर उनका ऐसा अजीब मिलाप कराते हैं कि समाज का चहेरा उजागर हो जाता है और हिन्दी कहानी का चेहरा बदल जाता है। ये कहानियाँ अपनी कहनशैली के लिए भी लम्बे समय तक याद की जाएँगी। वातावरण तथा चरित्रों की जैसी सघन पड़ताल और बात कहने के लिए जैसी तिर्यक भाषा 'इस उम्र में' की रचनाओं में सतत मौजूद है, वह हिन्दी कहानी में विरल है। 'इस उम्र में' की कहानियाँ सुविख्यात कथाशिल्पी श्रीलाल शुक्ल की अनेक कृतियों की तरह गहरी हलचल पैदा करने की सामथ्र्य रखती हैं। वे इस बात का सुरा$ग भी देती हैं कि क्यों श्रीलाल शुक्ल की रचनाओं के प्रति लोगों में हमेशा एक उत्सुकता, इज़्$जत और अधीर प्रतीक्षा बनी रहती है।
हिन्दी साहित्य के शिखर रचनाकार श्रीलाल शुक्ल की नई कहानियों का संग्रह है 'इस उम्र में'! यह एक अप्रतिम लेखक की अपने सामाजिक यथार्थ पर अचूक पकड़ और उसे बयान करने की उसकी अदभुत कला का साक्ष्य है। उसकी कहानियाँ हिन्दी कहानी की रूढिय़ों, फामूर्लों, खाद्यानों से दूर खड़ी हैं और रचना के संसार में नई निर...

Autoren-Profil

जन्म : 31 दिसम्बर, 1925 को लखनऊ जनपद (उ.प्र.) के अतरौली गाँव में। शिक्षा : इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक। कृतियाँ : उपन्यास : सूनी घाटी का सूरज, अज्ञातवास, राग दरबारी, आदमी का जहर, सीमाएँ टूटती हैं, मकान, पहला पड़ाव, बिस्रामपुर का सन्त। कहानी-संग्रह : यह घर मेरा नहीं, सुरक्षा तथा अन्य कहानियाँ, इस उम्र में। व्यंग्य-संग्रह : अंगद का पाँव, यहाँ से वहाँ, मेरी श्रेष्ठ व्यंग्य रचनाएँ, उमरावनगर में कुछ दिन, कुछ जमीन पर कुछ हवा में, आओ बैठ लें कुछ देर, अगली शताब्दी का शहर, जहालत के पचास साल। आलोचना : अज्ञेय : कुछ राग और कुछ रंग। विनिबन्ध : भगवतीचरण वर्मा, अमृतलाल नागर। बाल-साहित्य : बब्बर सिंह और उसके साथी। अनुवाद : 'पहला पड़ाव’ अंग्रेजी में अनूदित और 'मकान’ बांग्ला में। 'राग दरबारी’ सभी प्रमुख भारतीय भाषाओं सहित अंग्रेजी में। प्रमुख सम्मान : ज्ञानपीठ सम्मान, पद्मभूषण सम्मान, साहित्य अकादेमी पुरस्कार, साहित्य भूषण सम्मान, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय का गोयल साहित्य पुरस्कार, लोहिया अतिविशिष्ट सम्मान, म.प्र. शासन का शरद जोशी सम्मान, मैथिलीशरण गुप्त सम्मान, व्यास सम्मान। निधन : 28 अक्टूबर, 2011
जन्म : 31 दिसम्बर, 1925 को लखनऊ जनपद (उ.प्र.) के अतरौली गाँव में। शिक्षा : इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक। कृतियाँ : उपन्यास : सूनी घाटी का सूरज, अज्ञातवास, राग दरबारी, आदमी का जहर, सीमाएँ टूटती हैं, मकान, पहला पड़ाव, बिस्रामपुर का सन्त। कहानी-संग्रह : यह घर मेरा नहीं, सुरक्षा तथा अन्य कहानियाँ,...

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