जन्म: 21 दिसंबर, 1925 को डिबाई, ज़िला बुलंदशहर (उ.प्र.) में। 1947 में पाकिस्तान गए और लाहौर में बसेरा। पाकिस्तान के शीर्षस्थ कथाकार।
शिक्षा: प्रारम्भिक और धार्मिक शिक्षा घर पर हुई। हापुड़ से हाईस्कूल किया, 1946 में मेरठ कॉलेज से उर्दू में एम.ए.। जीविका: पत्रकारिता - दैनिक इमरोज़, आफ़ाक़, नवाए-वक्श्त और मशरिक़ से संबद्ध रहे। साहित्यिक पत्रिका - ‘अदबे-लतीफ़’ के संपादक रहे। पहली कहानी ‘क़य्यूमा की दुकान’ अप्रैल 1948 में लिखी जो दिसम्बर 1948 में ‘अदबे-लतीफ़’ में प्रकाशित हुई।
कृतियाँ: उपन्यास: चाँदगहन, बस्ती, आगे समन्दर है, तजि़्करा (नया घर); लघु उपन्यास: दिन और दास्तान। सम्पूर्ण कहानियाँ: जनम कहानियाँ: खंड 1, क़िस्सा कहानियाँ: खंड 2; कहानी-संग्रह: गली-कूचे, कंकरी, आख़िरी आदमी, शहरे-अफ़सोस, कछुए, ख़ेमे से दूर, ख़ाली पिंजरा, शह्रज़ाद के नाम, एन अनरिटेन एपिक एंड अदर स्टोरीज़ (अंग्रेज़ी में अनुवाद); आलोचना: अलामतों का ज़वाल; यात्रा-कथा: ज़मीन और फ़लक, नए शहर, पुरानी बस्तियाँ; संस्मरण: चराग़ों का धुआँ, दिल्ली जो एक शहर था; जीवनी: अजमले-आज़म (हकीम अजमल खाँ की जीवनी); अख़बारी कॉलम: ज़र्रे; अनुवाद: घास के मैदानों में: चेखव, नई पौद: तुर्गनेफ़, सुखऱ् तम्ग़ा: स्टीफ़न क्रेन (उपन्यास); नाव (अमरीकी कहानियों का चयन); हमारी बस्ती: थार्नटन वाइल्डर (नाटक); फ़लसफ़ा की नई तश्कील: जॉन डेवी (दर्शनशास्त्र); माऊज़े तुंग: स्टेवर्ट श्रेम; संपादन: इंशा की दो कहानियाँ, हज़ार दास्तान: रतननाथ सरशार।
सम्मान: बस्ती के लिए पाकिस्तान के सबसे बड़े पुरस्कार ‘आदमजी एवार्ड’ से सम्मानित। बाद में इस पुरस्कार को इंतिज़ार हुसैन ने वापस कर दिया।
संप्रति: अंग्रेज़ी दैनिक ‘डॉन’ (कराची) में स्तंभ लेखन।