Gram-Bangla

· Radhakrishna Prakashan
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ग्राम बांग्ला में सात उपन्यासिकाएँ—ग्राम बांग्ला, सीमान्त, अँधेरे की सन्तान, राजा, स्वदेश की धूलि, लाइफर और तेपान्तरी। कहने को ये अलग-अलग उपन्यासिकाएँ हैं लेकिन समग्रता में ये ग्रामीण बंगाल की ताजा तस्वीर बनाती हैं। वैसे ग्रामीण बंगाल भारत के किसी ग्रामीण समाज से अलग नहीं दिखता। थोड़े-बहुत भौगोलिक-सांस्कृतिक अन्तर के बावजूद वह भारतीय ग्रामीण समाज जैसा ही लगता है। हिन्दीभाषी समाज की तो विशेष निकटता बंगाल से रही है। समाज क्या सिर्फ मुख्यधारा—यानी खाते-पीते-अघाए लोगों का होता है? क्या लेखक सिर्फ इन्हीं के जीवन के इर्द-गिर्द ध्यान रखता रहेगा? प्रख्यात लेखिका महाश्वेता देवी के सामने स्पष्ट रहा है कि मुख्यधारा समृद्ध है, मगर संख्या में छोटी है। समाज में बृहत्तर हिस्सा हाशिए पर धकेल दिए गए लोगों का है। और, ऐसे लोग साहित्य की उपेक्षा के भी शिकार रहे हैं। इसीलिए वे समाज के सीमान्त पर बसे लोगों को अपनी संवेदना-सहानुभूति का केन्द्र बनाती हैं। इसीलिए वे स्टेशन के फेरीवालों, आदिवासियों, छोटी जगहों के राजनीतिक कार्यकर्ताओं, सपेरों, डायन करार दी गई स्त्रियों जैसे चरित्रों एवं छोटी-छोटी संख्या वाले समुदायों पर लिखती हैं। खूब लिखती हैं और कलात्मक उत्कर्ष की परवाह किए बगैर लिखती हैं। ''अब मुझमें साहित्य के शिल्पगत उत्कर्ष का कोई आग्रह नहीं रहा।ÓÓ लेकिन नई विषय-वस्तु के संधान का उत्साह और साहस उनमें हमेशा बरकरार रहा। पूरे संकलन में यह साहस दीखता है। पश्चिम बंगाल में लोकप्रिय वामपन्थी सरकार द्वारा बटाईदारों के पक्ष में चलाए गए ऑपरेशन वर्गा की असलियत वह बेहिचक सामने लाती हैं। वर्ग-संघर्ष के बारे में वे सवाल करती हैं—यह कैसा वर्ग-संघर्ष है जिसमें एक ही वर्ग के लोग एक-दूसरे के शत्रु बन रहे हैं? 'सीमान्त' में वे कहती हैं—'सती-साध्वी होना एक प्रकार का रोग है। एक बार पकड़ लेता है तो कभी छोड़ता नहीं।' यह संकलन बिरल लेखकीय साहस का प्रतिमान है।
ग्राम बांग्ला में सात उपन्यासिकाएँ—ग्राम बांग्ला, सीमान्त, अँधेरे की सन्तान, राजा, स्वदेश की धूलि, लाइफर और तेपान्तरी। कहने को ये अलग-अलग उपन्यासिकाएँ हैं लेकिन समग्रता में ये ग्रामीण बंगाल की ताजा तस्वीर बनाती हैं। वैसे ग्रामीण बंगाल भारत के किसी ग्रामीण समाज से अलग नहीं दिखता। थोड़े-बहुत भौगोलि...

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महाश्वेता देवी जन्म : 1926, ढाका। पिता श्री मनीष घटक सुप्रसिद्ध लेखक थे। शिक्षा : प्रारम्भिक पढ़ाई शान्तिनिकेतन में, फिर कलकत्ता विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में एम.ए.। अर्से तक अंग्रेजी का अध्यापन। कृतियाँ अनेक भाषाओं में अनूदित। हिन्दी में अनूदित कृतियाँ : चोट्टि मुण्डा और उसका तीर, जंगल के दावेदार, अग्निगर्भ, अक्लांत कौरव, 1084वें की माँ, श्री श्रीगणेश महिमा, टेरोडैक्टिल, दौलति, ग्राम बांग्ला, शालगिरह की पुकार पर, भूख, झाँसी की रानी, आंधारमानिक, उन्तीसवीं धारा का आरोपी, मातृछवि, सच-झूठ, अमृत संचय, जली थी अग्निशिखा, भटकाव, नीलछवि, कवि वन्द्यघटी गाईं का जीवन और मृत्यु, बनिया-बहू, नटी (उपन्यास); पचास कहानियाँ, कृष्णद्वादशी, घहराती घटाएँ, ईंट के ऊपर ईंट, मूर्ति, (कहानी-संग्रह); भारत में बँधुआ मजदूर (विमर्श)। सम्मान : ‘जंगल के दावेदार’ पुस्तक पर ‘साहित्य अकादेमी पुरस्कार’। ‘मैगसेसे अवार्ड’ तथा ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार’ द्वारा सम्मानित। निधन : 28-07-2016 (कोलकाता)।
महाश्वेता देवी जन्म : 1926, ढाका। पिता श्री मनीष घटक सुप्रसिद्ध लेखक थे। शिक्षा : प्रारम्भिक पढ़ाई शान्तिनिकेतन में, फिर कलकत्ता विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में एम.ए.। अर्से तक अंग्रेजी का अध्यापन। कृतियाँ अनेक भाषाओं में अनूदित। हिन्दी में अनूदित कृतियाँ : चोट्टि मुण्डा और उसका तीर, जंगल क...

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