दिदेरो की यह कृति दरअसल तीन संवादों-‘दलाम्बेर और दिदेरो का संवाद’, ‘दलाम्बेर का सपना’ अरु ‘संवाद का उत्तर भाग’-की श्रृंखला है ! बेहद दिलचस्प और मौलिक ढंग से विज्ञान के सवालों पर चर्चा करते हुए भी इसका मूल उद्देश्य जीवविज्ञान की प्रस्थापनाएं प्रस्तुत करना नहीं बल्कि अधिभूतवाद, पारंपरिक नैतिकता, अलौकिक शक्तियों में विश्वास और दकियानूसी के विरुद्ध भौतिकवादी नियत्ववाद का बिगुल फूंकना था जिनका इस्तेमाल प्रभुत्वशाली वर्ग बाकी मनुष्यों के जीवन को नियंत्रित करने के लिए करता था ! दिदेरो की खास शैली में वैज्ञानिक चिंतन और गीतात्मकता का मेल करनेवाली यह रचना इसलिए करीब ढाई सौ वर्ष बाद भी दुनिया भर के पाठको को आकर्षित करती है !
दिदेरो की यह कृति दरअसल तीन संवादों-‘दलाम्बेर और दिदेरो का संवाद’, ‘दलाम्बेर का सपना’ अरु ‘संवाद का उत्तर भाग’-की श्रृंखला है ! बेहद दिलचस्प और मौलिक ढंग से विज्ञान के सवालों पर चर्चा करते हुए भी इसका मूल उद्देश्य जीवविज्ञान की प्रस्थापनाएं प्रस्तुत करना नहीं बल्कि अधिभूतवाद, पारंपरिक नैतिकता, अल...