Bhookh

· Rajkamal Prakashan
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विकास और समानता के दावों के घटाटोप के नीचे असंतोष सुलगता रहता है । राजसत्ता आँख मूँदे रहती है और स्थिरता एवं शांति का दावा करती रहती है । जब तक असंतोष को क्रोध का रास्ता नहीं मिलता, तब तक सबकुछ ठीकठाक है' का भ्रम बना रहता है । छोटे-छोटे संघर्ष चलते रहते हैं और अभिजन यथास्थिति के मुगालते में डूबे रहते हैं । इस कथ्य को आधार बनाकर लिखा गया उपन्यास । भूख स्थानीय स्तर की एक बड़ी लड़ाई की दास्तान है । बिहार का पठारी जिला पता! का गाँव खेड़ा । कागज पर शासन बिहार की सरकार का और वास्तविक कब्जा लरातू के आदमखोर कुँवर का । बचे-खुचे सामंती दलदल की उपज कुँवर की जो जंगल का राजा, जंगल के उत्पाद का लुटेरा और आदिवासियों की अस्मत को खिलौने की तरह उछालने वाला है । तेतरी के साथ बलात्कार, बेगार-बँधुआ बनाए गए आदिवासी, सुलगता असंतोष और दिशा देती परिवर्तनकामी शक्तियाँ कुँवर को चुनौती देती हैं । नौकरशाही कुँवर के सामने लाचार है । लेकिन दलितों के असंतोष का क्रांतिकारी दावानल जब भड़कता है तो कुँवर मारा जाता है । प्रख्यात बंगला लेखिका महाश्वेता देवी ने अन्याय के घृणित रूपों और उसके विरुद्ध चल रहे जन-संघर्ष की दहकती कथा पाठकों के समक्ष रखी है ।
विकास और समानता के दावों के घटाटोप के नीचे असंतोष सुलगता रहता है । राजसत्ता आँख मूँदे रहती है और स्थिरता एवं शांति का दावा करती रहती है । जब तक असंतोष को क्रोध का रास्ता नहीं मिलता, तब तक सबकुछ ठीकठाक है' का भ्रम बना रहता है । छोटे-छोटे संघर्ष चलते रहते हैं और अभिजन यथास्थिति के मुगालते में डूबे ...

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രചയിതാവിനെ കുറിച്ച്

महाश्वेता देवी जन्म : 1926, ढाका। पिता श्री मनीष घटक सुप्रसिद्ध लेखक थे। शिक्षा : प्रारम्भिक पढ़ाई शान्तिनिकेतन में, फिर कलकत्ता विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में एम.ए.। अर्से तक अंग्रेजी का अध्यापन। कृतियाँ अनेक भाषाओं में अनूदित। हिन्दी में अनूदित कृतियाँ : चोट्टि मुण्डा और उसका तीर, जंगल के दावेदार, अग्निगर्भ, अक्लांत कौरव, 1084वें की माँ, श्री श्रीगणेश महिमा, टेरोडैक्टिल, दौलति, ग्राम बांग्ला, शालगिरह की पुकार पर, भूख, झाँसी की रानी, आंधारमानिक, उन्तीसवीं धारा का आरोपी, मातृछवि, सच-झूठ, अमृत संचय, जली थी अग्निशिखा, भटकाव, नीलछवि, कवि वन्द्यघटी गाईं का जीवन और मृत्यु, बनिया-बहू, नटी (उपन्यास); पचास कहानियाँ, कृष्णद्वादशी, घहराती घटाएँ, ईंट के ऊपर ईंट, मूर्ति, (कहानी-संग्रह); भारत में बँधुआ मजदूर (विमर्श)। सम्मान : ‘जंगल के दावेदार’ पुस्तक पर ‘साहित्य अकादेमी पुरस्कार’। ‘मैगसेसे अवार्ड’ तथा ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार’ द्वारा सम्मानित। निधन : 28-07-2016 (कोलकाता)।
महाश्वेता देवी जन्म : 1926, ढाका। पिता श्री मनीष घटक सुप्रसिद्ध लेखक थे। शिक्षा : प्रारम्भिक पढ़ाई शान्तिनिकेतन में, फिर कलकत्ता विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में एम.ए.। अर्से तक अंग्रेजी का अध्यापन। कृतियाँ अनेक भाषाओं में अनूदित। हिन्दी में अनूदित कृतियाँ : चोट्टि मुण्डा और उसका तीर, जंगल क...

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