Aanandmath

· Rajkamal Prakashan
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187
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आनंदमठ, यानी बांग्ला के विख्यात उपन्यासकार बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय का वह कालजयी उपन्यास, जिसने भारतीय स्वाधीनता आंदोलन में लाखों-करोड़ों हृदयों को आंदोलित किया और सहòों युवक-युवतियों को अंग्रेजों के विरुद्ध सशस्त्रा संघर्ष की प्रेरणा दी। उल्लेखनीय है कि इसमें प्रयुक्त ‘बंदेमातरम्’ गीत क्रांति का बीजमंत्रा तो बना ही, आसेतु हिमालय एक विशिष्ट अभिवादन के रूप में भी स्वीकारा गया। इसके बावजूद सन् 1920 के बाद भारतीय राजनीति में उभारे गए हिंदू-मुस्लिम सांप्रदायिक विद्वेष ने ‘स्वाधीनता के इस जीवन-वेद’ को भी अपनी चपेट में लिये बिना नहीं छोड़ा। कथावस्तु के नाते यह उपन्यास 1770-71 के दौरान उतरी बंगाल में पड़े भयानक दुर्भिक्ष की पृष्ठभूमि में ऐतिहासिक संन्यासी-विद्रोह की महागाथा है। प्रेम, त्याग, करुणा और बलिदान जैसे मानवीय गुणों से ओत-प्रोत यह कथाकृति अपनी ज्वलंत सामाजिक चेतना और राष्ट्रीय भावना के लिए हमें आज भी झकझोरने में समर्थ है। इसके अतिरिक्त इस संस्करण का दस्तावेजी महत्त्व भी है। यहाँ इसे न सिर्फ इसके मूल पाठ, अर्थात् विवादास्पद अंशों सहित प्रस्तुत किया गया है, बल्कि इससे जुड़े ऐतिहासिक विवाद को विश्लेषित करने वाले दो महत्त्वपूर्ण लेख भी इसमें शामिल किए गए हैं।
आनंदमठ, यानी बांग्ला के विख्यात उपन्यासकार बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय का वह कालजयी उपन्यास, जिसने भारतीय स्वाधीनता आंदोलन में लाखों-करोड़ों हृदयों को आंदोलित किया और सहòों युवक-युवतियों को अंग्रेजों के विरुद्ध सशस्त्रा संघर्ष की प्रेरणा दी। उल्लेखनीय है कि इसमें प्रयुक्त ‘बंदेमातरम्’ गीत क्रांति का ब...

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5 reviews
Being Human
April 12, 2020
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बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय जन्म : राष्ट्रीय गीत वन्दे मातरम के रचयिता बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय का जन्म 1838 को उत्तरी चौबीस परगना के कन्थलपाडा में एक समृद्ध बंगाली परिवार में हुआ था | शिक्षा : सन 1857 में बी.ए. उतीर्ण करने के पश्चात् 1869 में कानून की डिग्री हासिल की | प्रेसिडेंसी कालेज से बी.ए. की उपाधि लेनेवाले ये पहले भारतीय थे | गतिविधियाँ : शिक्षा के उपरांत डिप्टी मजिस्ट्रेट के पद पर आपकी नियुक्ति हो गयी | कुछ समय तक बंगाल सरकार के सचिव पद पर कार्यरत थे और सी.आई.ई. की उपाधि हासिल की | सन 1891 में सरकारी नौकरी से रिटायर हुए | साहित्य-सेवा : आपकी पहचान बांग्ला कवि, उपन्यासकार और पत्रकार के रूप में है | प्रथम प्रकाशित रचना राजा राममोहन वाइज थी | प्रथम प्रकाशित बंग्लाकृति 'दुर्गेशनन्दिनी' मार्च, 1865 में | अगली रचना 'कपाल कुंडला' 1866 में प्रकाशित | आपकी कविताये लालिता और मानस नामक संग्रह में प्रकाशित हुई | आपने धर्म, सामाजिक और समसामयिक मुद्दों पर आधारित कई निबंध लिखे | निधन : सन 1894 में |
बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय जन्म : राष्ट्रीय गीत वन्दे मातरम के रचयिता बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय का जन्म 1838 को उत्तरी चौबीस परगना के कन्थलपाडा में एक समृद्ध बंगाली परिवार में हुआ था | शिक्षा : सन 1857 में बी.ए. उतीर्ण करने के पश्चात् 1869 में कानून की डिग्री हासिल की | प्रेसिडेंसी कालेज से बी.ए. की उ...

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