गहन चिंतन और आत्म-अनुभूति के आधार पर यह पुस्तक विशेष रूप से मनुष्य के उस गूढ़ अनुभव को वैज्ञानिक और दार्शनिक आयाम देती है, जहाँ आयु के साथ न्यूरोहार्मोन रिसेप्टर्स का क्षीण होना मुक्ति के आध्यात्मिक भाव को सहजता प्रदान करता है। यह क्षरण केवल अवनति नहीं है अपितु चेतना का भौतिक बंधन से मुक्ति की ओर नियोजित प्रस्थान है।
यह आपको स्वयं के भीतर झाँकने, अपने कर्मों के उद्देश्य को समझने और जीवन को 'सबकुछ' मानकर-न कि 'माया' मानकर-पूर्ण चेतना के साथ जीने के लिए प्रेरित करता है।
अशोक तिवारी
वैश्विक वैज्ञानिक पटल पर स्थापित एक प्रख्यात भारतीय वैज्ञानिक और शिक्षाविद् हैं। काशी हिंदू विश्वविद्यालय से अपनी पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की। वे इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी (IICT), हैदराबाद में मुख्य वैज्ञानिक के सर्वोच्च पद तक पहुँचे। उनका नाम स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय (USA) द्वारा जारी विश्व के श्रेष्ठतम 2% वैज्ञानिकों की सूची में शामिल है।
अरुण तिवारी
सन् 1955 में जन्मे अरुण तिवारी एक प्रख्यात मिसाइल वैज्ञानिक, लेखक और शिक्षक हैं। उनकी शैक्षिक यात्रा की नींव जी.बी. पंत विश्वविद्यालय में पड़ी, जहाँ से उन्होंने मेकैनिकल इंजीनियरिंग में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की। उनके व्यावसायिक जीवन का स्वर्णिम अध्याय 1982 में प्रारंभ हुआ, जब वे रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) से जुड़े। वहाँ भारत के पूर्व राष्ट्रपति एवं 'मिसाइलमैन' के नाम से विख्यात डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के मार्गदर्शन में उन्होंने मिसाइल तकनीक के क्षेत्र में काम किया। डॉ. कलाम की कालजयी आत्मकथा 'अग्नि की उड़ान' के सह-लेखक हैं।