Amrit Aur Vish

· Lokbharti Prakashan
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477
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About this ebook

शिकरमों और ऊंट-गाड़ियों के एक सदी पुराने ज़माने से लेकर आज तक के तेजी से बदलते हुए रोचक मार्मिक और सहज जन-जीवन के अन्तरंग जिवंत चित्रों का वर्णन पढ़ते-पढ़ते आप यह भूल जायेंगे कि उपन्यास पढ़ रहे हैं, बल्कि यह अनुभव करेंगे कि आप स्वयं भी इस वतावारण के ही एक अभिन्न अंग हैं ! इसकी रचना-शैली का अनूठापन औसत और प्रबुद्ध दोनों प्रकार के पाठकों को अपने-अपने ढंग से किन्तु समान रूप से प्रभावित करने की क्षमता रखता है ! लेखक की सूक्ष्म मनोवैज्ञानिक, समाजशास्त्रीय और दार्शनिक दृष्टि से जिस तन्मयता और गहराई से व्यक्ति और समाज का मनोरूप दर्शन यहाँ प्रस्तुत किया है, वह पाठकों का आमतौर से अन्यत्र दुर्लभ है ! पुस्तक एक बार हाथ में उठा लेने पर पूरा पढ़े बिना आप रह नहीं सकते ! यही नहीं, आप इसे बार-बार पढेंगे और हर बार एक नई दृष्टि और नये रस-बोध की ताजगी पाएंगे !
शिकरमों और ऊंट-गाड़ियों के एक सदी पुराने ज़माने से लेकर आज तक के तेजी से बदलते हुए रोचक मार्मिक और सहज जन-जीवन के अन्तरंग जिवंत चित्रों का वर्णन पढ़ते-पढ़ते आप यह भूल जायेंगे कि उपन्यास पढ़ रहे हैं, बल्कि यह अनुभव करेंगे कि आप स्वयं भी इस वतावारण के ही एक अभिन्न अंग हैं ! इसकी रचना-शैली का अनूठापन औसत...

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नागरजी का जन्म 17 अगस्त, 1916 को आगरा में हुआ। लखनऊ में शिक्षा प्राप्त की और फिर वहीं बस गये। तस्लीम लखनवी, मेघराज, इंद्र आदि उपनामों से भी लेखन किया है। बंगला, तमिल, गुजराती और मराठी भाषाओं के ज्ञाता। उनकी रचनाओं में ‘वाटिका’, ‘अवशेष’, ‘नवाबी मसनद’, ‘तुलाराम शास्त्री’, ‘एटम बम’, ‘एक दिल हजार दास्ताँ’, ‘पीपल की परी’, नामक कहानी-संग्रह; ‘महाकाल’, ‘सेठ बाँकेमल’, ‘बूँद और समुद्र’, ‘शतरंज के मोहरे’, ‘अमृत और विष’ आदि उपन्यास, ‘गदर के फूल’, ‘ये कोठेवालियाँ’ आदि शोधकृतियाँ तथा बाल-साहित्य की ‘नटखट चाची’, ‘निंदिया आजा’ आदि उल्लेखनीय हैं। अन्य महत्त्वपूर्ण कृतियों में तुलसी के जीवन पर आधारित महाकाव्यात्मक उपन्यास ‘मानस का हंस’; हास्य-व्यंग्य संग्रह ‘कृपया दाएँ चलिये’, ‘भरत पुत्र नौरंगीलाल’ तथा संस्मरण-संग्रह ‘जिनके साथ जिया’ प्रमुख हैं। नागरजी साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत हुए और उनकी अनेक कृतियाँ उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा भी पुरस्कृत हुई हैं। निधन: 23 फरवरी, 1990
नागरजी का जन्म 17 अगस्त, 1916 को आगरा में हुआ। लखनऊ में शिक्षा प्राप्त की और फिर वहीं बस गये। तस्लीम लखनवी, मेघराज, इंद्र आदि उपनामों से भी लेखन किया है। बंगला, तमिल, गुजराती और मराठी भाषाओं के ज्ञाता। उनकी रचनाओं में ‘वाटिका’, ‘अवशेष’, ‘नवाबी मसनद’, ‘तुलाराम शास्त्री’, ‘एटम बम’, ‘एक दिल हजार दास...

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