उनकी कहानियों में विडम्बनामूलक व्यंग्य और गम्भीर अवलोकन साथ-साथ चलते हैं। यथार्थ के टटके बिम्ब, स्पष्ट विवरण और इन सबके बीच अपने अस्तित्व का अर्थ खोजते उनके पात्र एक गहरा प्रभाव पाठक के मन पर छोड़ते हैं। कहा जाता है कि एलिस मनरो एक ऐसी कथाकार हैं जिन्होंने जीवन की ऊब का अंकन इतने दिलचस्प ढंग से किया है कि उसे पढ़ते हुए किसी को ऊब नहीं होती।
‘बेलगाम’ में उनके मूल कहानी-संग्रह ‘रनअवे’ की कुछ कहानियों का अनुवाद प्रस्तुत किया जा रहा है। 24 में प्रकाशित इस पुस्तक को कनाडा के शीर्षस्थ साहित्यिक पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।