Patan

· Rajkamal Prakashan
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प्रस्तुत पुस्तक ‘पतन’ वर्मा जी का प्रथम उपन्यास है जिसकी रचना उन्होंने अपने कालेज के दिनों में की थी। भगवतीचरण वर्मा हिन्दी जगत के जाने-माने विख्यात उपन्यासकार
हैं।

उनके सभी उपन्यासों में एक विविधता है। हास्य, व्यंग्य, समाज, मनोविज्ञान और दर्शन सभी विषयों पर उपन्यास लिखे हैं। कवि और कथाकार होने के कारण वर्मा जी के उपन्यासों में भावनात्मक और बौद्धिकता का सामंजस्य मिलता है। वर्मा जी के उपन्यासों को पढ़ते समय यह सदा ध्यान रखना चाहिए कि वे मूलत: एक छायावादी और प्रगतिवादी कवि हैं और उनके कथा साहित्य में कविता की भावना की प्रधानता बौद्धिक यथार्थ से कभी अलग नहीं होती। उपन्यासों के अब तक परम्परागत शिथिल और बने-बनाए रूप-विन्यास और कथन-शैली की नई शक्ति और सम्पन्नता ही नहीं, वरन् कथावस्तु का नया विस्तार भी मिला।

प्रस्तुत पुस्तक ‘पतन’ वर्मा जी का प्रथम उपन्यास है जिसकी रचना उन्होंने अपने कालेज के दिनों में की थी। भगवतीचरण वर्मा हिन्दी जगत के जाने-माने विख्यात उपन्यासकार हैं। उनके सभी उपन्यासों में एक विविधता है। हास्य, व्यंग्य, समाज, मनोविज्ञान और दर्शन सभी विषयों पर उपन्यास लिखे हैं। कवि और कथाकार होने...

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