“भू नाद” एक ऐसा ब्रह्मांड है जहाँ यक्षों ने युद्ध की जगह व्यापार चुना, जहाँ दो तारा-साम्राज्य — सूर्यवंशी और चंद्रवंशी — एक संधि पर टिके हैं जो दस लाख साल से नहीं टूटी, और जहाँ उस संधि का सबसे सख़्त क़ानून एक ही चीज़ को मना करता है: कुल की लकीर पार करके प्रेम करना।
“जिनमाया दुरक्ति” इसी ब्रह्मांड में बसी एक त्रयी है — तीन किताबों में फैली एक ही पुरानी पहेली: सुरक्ति — पवित्र समर्पण — आज दुरक्ति क्यों कहलाती है? एक आत्मा दो शरीरों में क्यों बँटी रह गई? और जब बचाने के लिए मिटाना पड़े, तो धर्म किसकी तरफ़ होता है?
त्रयी की पहली किताब, “दुरक्ति ओरिजिन्स: प्रेम का अंतिम गीत”, उसी सवाल से शुरू होती है — दस हज़ार साल पुराने एक दर्द से, एक राख हो चुकी दुनिया से, और एक ऐसे प्रेम से जो सभ्यता से भी पुराना है।
लेखक अश्विन चित्रांश की पहली गाथा, और “भू नाद” ब्रह्मांड की नींव — एक त्रयी जिसका हर पन्ना यही पूछता रहेगा: क्या प्रेम सच में नफ़रत से ज़्यादा ताक़तवर है, या यह बस एक और तलवार है, जो अभी गढ़ी जानी बाक़ी है?