देवकीनंदन खत्री की पुस्तक "भूतनाथ" उनकी प्रसिद्ध रचना "चंद्रकांता" और "चंद्रकांता संतति" का विस्तार है। यह उपन्यास रहस्य, रोमांच और ऐयारी कला का अद्भुत मिश्रण है, जिसमें भूतनाथ नामक चरित्र की जीवन यात्रा और संघर्षों का वर्णन किया गया है। भूतनाथ एक ऐयार है, जो अपनी चतुराई और चालाकी से विभिन्न रहस्यमय परिस्थितियों का सामना करता है। उपन्यास में गुप्त सुरंगों, जादुई ताकतों, अद्भुत युक्तियों और खतरनाक षड्यंत्रों का रोमांचक चित्रण है, जो पाठकों को बांधे रखता है।
इस पुस्तक का उद्देश्य पाठकों का मनोरंजन करना और रहस्यमय कहानियों के प्रति रुचि पैदा करना था। इसके साथ ही, खत्री जी ने इस उपन्यास के माध्यम से न्याय, सत्य और कर्तव्य के महत्व को रेखांकित किया।
समाज की दृष्टि से, "भूतनाथ" में उस समय के सामाजिक ढांचे, वर्ग विभाजन और नैतिक संघर्षों का उल्लेख मिलता है। कहानी के पात्रों के माध्यम से जीवन में नैतिकता, साहस, और दायित्व निर्वहन के आदर्श प्रस्तुत किए गए हैं। यह उपन्यास भी हिंदी साहित्य में रुचि बढ़ाने और लोगों को हिंदी पढ़ने के लिए प्रेरित करने में सफल रहा। "भूतनाथ" ने रहस्य और रोमांच के साथ पाठकों को सामाजिक और नैतिक मूल्यों से जोड़ने का कार्य किया।