कश्कोल यानी भिक्षपात्र. इस भिक्षपात्र का खली रहना ही लेखक के जीवन को अर्थ और गति देता है. इसका भर जाना यानी लेखक का अंत हो जाना. ©Samvad Prakashan
कश्कोल यानी भिक्षपात्र. इस भिक्षपात्र का खली रहना ही लेखक के जीवन को अर्थ और गति देता है. इसका भर जाना यानी लेखक का अंत हो जाना. ©Samvad Prakashan