'मन अदहन' मधु चतुर्वेदी की 7 कहानियों का संग्रह है। इन कहानियों को पढ़ने का अहसास किसी रोलर कोस्टर की सवारी-सा है। एक तरफ 'मेरी झिल्ली' जैसी दिल को कचोट देने वाली मार्मिक कहानी है तो दूसरी तरफ़ लड़कपन की गली मोहल्लों वाली आवारगी से भरपूर 'पतंगबाज़ी'। 'बेबी दी की शादी' जैसा हास्य से भरपूर संस्मरण जिसे हँस-हँसकर पूरा पढ़कर खत्म कर लेने के फौरन बाद दुबारा पढ़ने लगते हैं। आँचलिकता की खुशबू से महकती 'गाँव की ओर' में बुजुर्ग नान बऊ का ऐसा किरदार जो सदा के लिए पाठकों के मन में बस जाए। 'बड़ी आँखों वाली' में तरुणाई की उस उद्दंडता की कहानी बाद में जिसका सामना करने में स्वयं को शर्मिंदगी हो। कहानी 'अम्मा की खाट' हो या पति-पत्नी के बीच रोज़ाना की चुहलबाज़ीयों वाले इश्क़ में भीगी 'प्यारे पतिदेव'—इन सभी रंगों के छीटे पाठक अपने जीवन में जरूर पाएँगे। सूर्य के प्रकाश के 7 रंगों की ही तरह ये 7 कहानियाँ भी भावनाओं का इंद्रधनुषी मेल हैं।
'मन अदहन' मधु चतुर्वेदी की 7 कहानियों का संग्रह है। इन कहानियों को पढ़ने का अहसास किसी रोलर कोस्टर की सवारी-सा है। एक तरफ 'मेरी झिल्ली' जैसी दिल को कचोट देने वाली मार्मिक कहानी है तो दूसरी तरफ़ लड़कपन की गली मोहल्लों वाली आवारगी से भरपूर 'पतंगबाज़ी'। 'बेबी दी की शादी' जैसा हास्य से भरपूर संस्मरण ...